शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015

Dengue Fever Treatment


डेंगू ज्वर को आम भाषा में हड्डी तोड़ बुखार भी कहते है यह रोग मच्छर के काटने से होने वाला रोग है जो कि डेंगू वायरस के कारण उत्पन्न होता है ! इस रोग में होने वाले लक्षणों के लिए संलग्न फोटो को देखें !
इस रोग में ब्लड प्लेटलेट्स कम होना तथा ब्लड प्लाज्मा का स्राव होना मुख्य रूप से होता है इस रोग में रोगी के शरीर का ब्लड प्रेशर भी बहुत तेजी से कम होने लगता है !
आयुर्वेद में इस रोग का कारगर उपचार उपलब्ध है .... आयुर्वेद औषधियों के माध्यम से रोग को आसानी से ठीक किया जा सकता है..!
इस रोग में रोगी के आहार का निर्धारण करना सबसे ज्यादा जरुरी है -
रोगी को आसानी से पचने वाले सुपाच्य आहार अल्प मात्रा में खाने को कहें !
पपीता, पपीते के पाती का स्वरस , गाय या बकरी का दूध (यदि बकरी का दूध मिल जाये तो लाभ और जल्दी मिलता है.), अनार, मौसमी , सेव , चीकू, किशमिश , मुनक्का , मूंग की दाल , गाजर , चुकंदर, सूप , लौकी , तोरई , कद्दू , परवल , टिंडा की पतली सब्जी, धनिया, जीरा आदि आहारों का अल्प मात्रा में प्रयोग करना चाहिए !
निम्न औषधियों का प्रयोग रोग इस रोग में लाभदायक है -
सर्व ज्वर हर लौह , सुदर्शन घन वटी , स्वर्ण सूत शेखर रस इनकी एक-एक गोली दिन में दो बार !
तालिसादि चूर्ण 60 ग्राम, अभ्रक भस्म 10 ग्राम, गिलोय सत्व 10 ग्राम , मुक्ता शुक्ति पिष्टी 10 ग्राम , स्वर्ण माक्षिक भस्म 10 ग्राम , प्रवाल पंचामृत / प्रवाल पिष्टी - 5 ग्राम इन सभी औषधियों को मिलाकर 2-2 ग्राम की मात्रा शहद के साथ दिन में दो बार दें !
अमृता रिष्ट 15-15 ml दिन में दो बार दें . मकोय अर्क 10-10 ml दिन में दो बार , जय मंगल रस की 1 गोली रात्रि में 10 दिन तक दें !
(औषधियों की मात्रा वयस्क रोगी के अनुसार है रोग एवं रोगी की स्थिति के अनुसार मात्रा में परिवर्तन चिकित्सक अपने अनुसार करें !)
इन औषधियों के अतिरिक्त रोग और रोगी की स्थिति के अनुसार पथ्यादि क्वाथ और स्वर्ण बसंत मालती रस का प्रयोग आवश्यकता होने पर किया जा सकता है !
Note: कभी भी यह रोग होने पर या रोग से सम्बंधित लक्षण होने पर तुरंत अपने आयुर्वेद के चिकित्सक से मिलें ! इन औषधियों को प्रयोग बिना 

घरेलू दर्दनाशक आयुर्वेदिक तेल ............

घरेलू दर्दनाशक आयुर्वेदिक तेल ............ ।

कई बार हमारे घुटनों, कमर, पीठ एवं पंसलियों आदि में दर्द हो जाता है । ऐसे ही दर्द को दूर करने के लिए बाजार में कई तरह के आयुर्वेदिक तेल मिलते हैं जिनसे मालिश करने से दर्द दूर हो जाता है ! आज ऐसा ही तेल बनाने कि विधि आपको बताता हूँ जो सस्ता, सरल और अचूक है और घर पर आराम से बनाया जा सकता है ।

सबसे पहले 40 ग्राम पुदीना सत्व, 40ग्राम अजवायन सत्व और 40 ग्राम ही कपूर ले । साफ़ बोतल में पुदीना सत्व डाल दें और उसके बाद अजवायन सत्व और कपूर को पीसकर उस बोतल में डाल दें जिसमें आगे पुदीना सत्व है । उसके बाद ढक्कन लगाकर हिला दें और रख दें । थोड़ी देर बाद तीनों चीजें मिलकर द्रव्य रूप में हो जायेगी और इसे ही अमृतधारा कहते हैं ।

अब 200 ग्राम लहसुन लें और उसके छिलके उतार कर लहसुन कि कलियों के छोटे छोटे टुकड़े कर लें । अब एक किलो सरसों का तेल कड़ाही में डालकर आंच पर गर्म होने के लिए रख दें । जब तेल पूरी तरह से गर्म हो जाए तो तेल को नीचे उतार कर ठंडा होने के लिए रख दें । जब तेल पूरा ठंडा हो जाए तो उसमें लहसुन के टुकड़े डालकर उसको फिर आंच पर चढाकर तेज और मंदी आंच में गर्म करें । तेल को इतना पकाए कि लहसुन कि कलियाँ जलकर काली हो जाए । तेल के बर्तन को आंच पर से उतारकर नीचे रखे और उसमें गर्म तेल में ही 80 ग्राम रतनजोत ( एक वृक्ष कि छाल होती है ) डाल दें इससे तेल का रंग लाल हो जाएगा ।

तेल के ठंडा होने पर कपडे से छानकर किसी साफ़ बोतल में भर लें । अब इस पकाए हुए तेल अमृतधारा और 400 ग्राम तारपीन का तेल मिलाकर अच्छी तरह से हिला दें । अब आपका मालिश के लिए दर्दनाशक लाल तेल तैयार है। जिसका उपयोग आप जब चाहे कर सकते हैं ।

डेंगू

डेंगू
डेंगू की सारी रामायण

छोटी छोटी युक्ति डेंगू से मुक्ति

पानी ठहरेगा जहां डेंगू पनपेगा वहां

एडिड मछर से फैलता है डेंगू

😀खुद डॉक्टर ना बने😀

सारे घर को चेक करें, टायर ,ट्यूब, प्लास्टिक के डब्बे ,कूलर, फ्रिज का वेस्ट पानी ,
अगर पानी हो तो सरसों का तेल, केरोसिन ,पेट्रोल ,डीजल डालें।

डेंगू तीन प्रकार का होता है।
1. क्लासिकल
2.हैमरेजिक
3.शोंक सिंड्रोम

क्लासिकल साधारण डेंगू है जो की कुछ समय बाद खुद ठीक हो जाता है। अधिकतर मरीज इसी डेंगू से पिड़ित हैं।

डेंगू के असली लक्षण

1तेज बुखार आना
2.सर भारी या सिर् में दर्द
3.उल्टी की शिक़ायत या जी मिचलाना।
4.सारे शरीर में दर्द।
5. 3 से 4 दिन बाद भी बुखार का उतरना चढना।

रोग के ज्यादा बढ़ने पर:-
1.मसूड़ो से खून आना। नाक कान मुँह से भी खून आ सकता है।
2.शरीर पर लाल रंग के चकते उभरना।।
तुरंत हस्पताल में जाऐं ।

डेंगू की अफवाएं 

आपको जानकर आशचर्य होगा की डेंगू कोई गम्भीर बीमारी नहीं है।
समय पर सचेत ना होने पर ,खुद डॉक्टर बनने पर,गलत दवाई लेने पर,ज्यादा घबराने पर,खाना पीना छोड़ देने पर और समय पर दवाई ना लेने पर ही यह रोग गंभीर हो जाता है।

😀प्लटलेट का राज😀
क्या हैं प्लेटलेट

हमारे शरीर में 15000 से 450000 प्लेटलेट्स होंने चाहियें ।

नोटः मौसमी बुखार में भी हमारे प्लेटलेट्स कम हो सकतें हैं इसलिए हर बुखार को डेंगू ना मानें।
दूसरी बात 40000 तक प्लेटलेट्स रह जाएं तो भी ना घबराएं । 25000 प्लेटलेट वाले मरीज ने भी इलाज मिलने के बाद 3 से 4 दिन में ही रिकोवर कर लिया।

प्लेटलेट घटते कैसे हैं।

1.किसी भी प्रकार का तरल ना लेने पर।

2.सामान्य बुखार में दी जाने वाली दवाएं जैसे की एंटी बायोटिक लेने पर।एंटी बायोटिक हमारे शरीर के प्लेटलेट्स पर असर डालती हैं।

3.मानसिक रूप से कमजोर होने पर। घबरा जाने पर । आप अपने दिमाग पर जोर देंगे हौसला छोड़ देंगे तो प्लेटलेटस घटने लगेंगे।

😀😀प्लेटलेट्स बढेंगें कैसे ।

1.ज्यादा से ज्यादा तरल पीने पर चाहे वो RO पानी ही क्यों न हो।

2.हर 1 या 2 घण्टे में बार बार पीने को दें।

3.अगर उल्टी आए तो ग्लूकोस चढ़वा सकते हैं ।

4.हौसला बनाये रखे इससे भी प्लेटलेट्स बढ़ने में मदद मिलेगी।
मरीज जल्दी रिकवर करेगा।

5.पीने में सिर्फ RO का या गरम करके ठंडा किया हुआ पानी दें।
नारियल पानी, अनार जूस ,मिक्स जूस, फ्रूटी, दूध , बकरी का उत्तम है।

6.घरेलू उपचार में गिलोय और पपीते के पत्तों को पीस कर रस पिला सकते हैं।गेहूं के हरे पोधे का रस भी उत्तम है।

7.बुखार आने पर सिर्फ पारासिटामोल की टेबलेट ही लें। एस्प्रिन ,ब्रुफिन् हरगिज न लें।
आजकल मार्किट में प्लेटलेट्स बढ़ाने की गोली भी आइ हुई है। आप वो भी ले सकतें हैं।

रोचक तथ्य: 

1.डेंगू का बुखार लगभग 2 से 10 दिन तक ही रहता है। हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शमता इसे हमारे शरीर के हिसाब से काबू कर लेती है।

2.अफवाओं से बचे व् समय पर इलाज लें।

3.कई हस्पतालों में आपके प्लेट्लेट्स को कम करके दिखाया जाता है। 60000 को 40000 दिखाकर आपको एडमिट कर लेते हैं।ऐसी कई शिकायतें मिलीं हैं।
सिविल हॉस्पिटस्ल में अब डेंगू का टेस्ट उपलब्ध है।

डेंगू के टेस्ट:👉

कार्ड द्वारा डेंगू का टेस्ट किया जाता है। जिसकी किमत् लगभग 800 रूपये होती है।

प्लेटलेट्स का टेस्ट डेंगू का टेस्ट नहीं होता।

आयुर्वेदिक उपचार:-

१. पपीता पत्र स्वरस १० मिली
गिलोय स्वरस १० मिली
नीमपत्र स्वरस २० ग्राम पत्तों से जितना निकले उतना
काली मिर्च ५ दाने पीसकर
सबको मिलाकर सुबह खाली पेट पिऐं. सात दिन तक प्रयोग करें. प्लेटलेट बढती है.

२. त्रिभुवनकीर्ति रस २५० मिग्रा
विषमज्वरांतक लौह २५० मिग्रा
गोदन्ती भस्म ५०० मिग्रा
गिलोय सत्व ५०० मिग्रा
संशमनी वटी २५० मिग्रा
सबको पीसकर ऐसी एक मात्रा आवश्यकतानुसार दिन में दो- तीन बार वासा स्वरस से.
अन्य परिस्थितिजन्य उपाय भी करें.

कोई भी चिकित्सा वैद्यकीय सलाह के बिना न करें. रोगी की स्थिति के अनुसार चिकित्सा में परिवर्तन हो सकता है. डेंगू घातक रोग है तत्काल आवश्यक चिकित्सा करें. स्वयं अपने डॉक्टर बनने का प्रयास न करें.

साईटिका का इलाज

साईटिका में होने वाला दर्द, स्याटिक नर्व के कारण होता है। यह दर्द सामान्यत: पैर 
के निचले हिस्से की तरफ फैलता है। ऐसा दर्द स्याटिक नर्व में किसी प्रकार के दबाव, 
सूजन या क्षति के कारण उत्पन्न होता है। इसमें चलने-उठने-बैठने तक में बहुत तकलीफ 
होती है। यह दर्द अकसर लोगों में 30 से 50 वर्ष की उम्र में होता है। इसकी चिकित्सा 
सर्जरी या वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से हो सकती है। 
साईटिका नर्व (नाड़ी) शरीर की सबसे लंबी नर्व होती है। यह नर्व कमर की हड्डी से गुजरकर जांघ के पिछले भाग से होती हुई पैरोँ के पिछले हिस्से मेँ जाती है। जब दर्द इसके रास्ते से होकर गुजरता है, तब ही यह साईटिका का दर्द कहलाता है। 

लक्षण :- 
कमर के निचले हिस्से मेँ दर्द के साथ जाँघ व टांग के पिछले हिस्से मेँ दर्द।
पैरोँ मेँ सुन्नपन के साथ मांसपेशियोँ मेँ कमजोरी का अनुभव।
पंजोँ मेँ सुन्नपन व झनझनाहट।
पैदल चलने में परेशानी। 

उपचार और बचाव :- 
1.... आलू का रस 300 ग्राम नित्य २ माह तक पीने से साईटिका रोग नियंत्रित होता है। इस उपचार का प्रभाव बढाने के लिये आलू के रस मे गाजर का रस भी मिश्रित करना चाहिये।
2.......लहसुन की खीर इस रोग के निवारण में महत्वपूर्ण है। 100 ग्राम दूध में 4-5 लहसुन की कली चाकू से बारीक काटकर डालें। इसे उबालकर ठंडी करके पीलें। यह विधान 2-3 माह तक जारी रखने से साईटिका रोग को उखाड फ़ैंकने में भरपूर मदद मिलती है। लहसुन में एन्टी ओक्सीडेन्ट तत्व होते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने हेतु मददगार होते है । हरे पत्तेदार सब्जियों का भरपूर उपयोग करना चाहिये। कच्चे लहसुन का उपयोग साईटिका रोग में अत्यंत गुणकारी है। सुबह शाम 2-3 लहसुन की कली पानी के साथ निगलने से भी फायदा होता है। हरी मटर, पालक, कलौंजी, केला, सूखे मेवे ज्यादा इस्तेमाल करें।
3......साईटिका रोग को ठीक करने में नींबू का अपना महत्व है। रोजाना नींबू के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से आशातीत लाभ होता है।
4.......सरसों के तेल में लहसुन पकालें। दर्द की जगह इस तेल की मालिश करने से तुरंत आराम लग जाता है।
5........लौह भस्म 20 ग्राम+विष्तिंदुक वटी 10 ग्राम+रस सिंदूर 20 ग्राम+त्रिकटु चूर्ण 20 ग्राम इन सबको अदरक के रस के साथ घोंटकर 250 गोलियां बनालें। दो-दो गोली पानी के साथ दिन में तीन बार लेते रहने से साईटिका रोग जड़ से समाप्त हो जाता है।

प्रतिदिन सामान्य व्यायाम करेँ। वजन नियंत्रण मेँ रखेँ। पौष्टिक आहार ग्रहण करेँ। रीढ़ की हड्डी को चलने-फिरने और उठते-बैठते समय सीधा रखेँ। भारी वजन न उठाएं।

बुधवार, 30 सितंबर 2015

आहार ही औषधि

आहार ही औषधी 🍏
🌽foods that heal
🍋🍐 भोजन द्वारा स्वास्थ्य🍒
(1)-केला: 🍌
ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,हड्डियों को मजबूत बनाता है,हृदय की सुरक्छा करता है,अतिसार में लाभदायक है, खांसी में हितकारी है।
(2)-जामुन: 🌑
केन्सर की रोक थाम,हृदय की सुरक्क्छा,कब्ज मिटाता है,स्मरण शक्ति बढाता है,रक्त शर्करा नियंत्रित करता है।डायबीटीज में अति लाभदायक।
(3)-सेवफ़ल: 
हृदय की सुरक्षा करता है, दस्त रोकता है,कब्ज में फ़ायदेमंद है,फ़ेफ़डे की शक्ति बढाता है.
(4)-चुकंदर:-🍐
वजन घटाता है,ब्लडप्रेशर नियंत्रित करता है,अस्थिक्छरण रोकता है,केंसर के विरुद्ध लडता है,हृदय की सुरक्षा करता है।
(5)-पत्ता गोभी: 🍏
बवासीर में हितकारी है,हृदय रोगों में लाभदायक है,कब्ज मिटाता है,वजन घटाने में सहायक है। केंसर में फ़ायदेमंद है।
(6)-गाजर:- 
नेत्र ज्योति वर्धक है, केंसर प्रतिरोधक है, वजन घटाने मेँ सहायक है, कब्ज मिटाता है, हृदय की सुरक्षा करता है।
(7)- फ़ूल गोभी:-🍈
हड्डियों को मजबूत बनाता है, स्तन केंसर से बचाव करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के केंसर में भी उपयोगी है, चोंट,खरोंच ठीक करता है।
(8)-लहसुन:
कोलेस्टरोल घटाती है, रक्त चाप घटाती है, कीटाणुनाशक है,केंसर से लडती है 
(9)-नींबू:
त्वचा को मुलायम बनाता है,केंसर अवरोधक है, हृदय की सुरक्छा करता है,,ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, स्कर्वी रोग नाशक है।
(10)-अंगूर:🍇
रक्त प्रवाह वर्धक है, हृदय की सुरक्छा करता है, केंसर से लडता है, गुर्दे की पथरी नष्ट करता है, नेत्र ज्योति वर्धक है।
(11)-आम:🍋
केंसर से बचाव करता है,थायराईड रोग में हितकारी है, पाचन शक्ति बढाता है, याददाश्त की कमजोरी में हितकर है।
(12)-प्याज: 🍑
फ़ंगस रोधी गुण हैं, हार्ट अटेक की रिस्क को कम करता है। जीवाणु नाशक है,केंसर विरोधी है खराब कोलेस्टरोल को घटाता है।
(14)-अलसी के बीज:
मानसिक शक्ति वर्धक है, रोग प्रतिकारक शक्ति को ताकत देता है, डायबीटीज में उपकारी है, हृदय की सुरक्षा करता है, पाचन शक्ति को ठीक करता है।
(15)-संतरा:🍈
हृदय की सुरक्षा करता है, रोग प्रतिकारक शक्ति उन्नत करता है,, श्वसन पथ के विकारों में लाभकारी है, केंसर में हितकारी है
(16)-टमाटर: 
कोलेस्टरोल कम करता है, प्रोस्टेट ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिये उपकारी है,केंसर से बचाव करता है, हृदय की सुरक्छ ।
(17)-पानी: 
गुर्दे की पथरी नाशक है, वजन घटाने में सहायक है, केसर के विरुद्ध लडता है, त्वचा के चमक बढाता है।
(18)-अखरोट: 
मूड उन्नत करन में सहायक है, मेमोरी पावर बढाता है,केंसर से लड सकता है, हृदय रोगों से बचाव करता है, कोलेस्टरोल घटाने मं मददगार है।
(19)-तरबूज:
स्ट्रोक रोकने में उपयोगी है, प्रोस्टेट के स्वास्थ्य के लियेओ हितकारी है, रक्तचाप घटाता है, वजन कम करने में सहायक है।
(20)-अंकुरित गेहूं: 
बडी आंत की केंसर से लडता है, कब्ज प्रतिकारक है, स्ट्रोक से रक्षा करता है, कोलेस्टरोल कम करता है, पाचन सुधारता है।

(21-आलू बुखारा:🍒
हृदय रोगों से बचाव करता है, बुढापा जल्द आने से रोकता है, याददाश्त बढाता है, कोलेस्टरोल घटाता है, कब्ज प्रतिकारक है।
(22)-पाएनेपल:🍍
अतिसार(दस्त) रोकता है, वार्ट्स(मस्से) ठीक करता है, सर्दी,ठंड से बचाव करता है, अस्थिin क्छरण रोकता है। पाचन सुधारता है।
(23)-जौ,जई: 🌽
कोलेlस्टरोल घटाता है,केंसर से लडता है, डायबीटीज में उपकारी है,,कब्ज प्रतिकारक् है ,त्वचा पर शाईनिंग लाता है।
(24)-अंजीर:
रक्त चाप नियंत्रित करता है, स्ट्रोक्स से बचाता है, कोलेस्टरोल कम करता है, केंसर से लडता है,वजन घटाने में सहायक है।
(25)-शकरकंद:🍠
आंखों की रोशनी बढाता है,मूड उन्नत करता है, हड्डिया बलवान बनाता है, केंसर से लडता है

आयुर्वेद में एंटीबायोटिक गुण वाली औषधी

आयुर्वेद में एंटीबायोटिक गुण वाली औषधियां

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आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग से बैक्टीरिया में resistance उत्पन्न नहीं होता है और यही इसका सबसे प्रभावी एंटीबायोटिक गुण है. आयुर्वेद विज्ञान में मनुष्य को स्वस्थ रखने के लिए अनेक औषधियों का वर्णन है. इन्हीं औषधियों से आजकल विदेशी कंपनियां उनके केमिकल निकाल कर दवा बनाती हैं और हमसे मुनाफ़ा कमाती हैं. प्राचीन काल से ही आयुर्वेद के चिकित्सकों ने ऐसे अनेक आयुर्वेदिक औषधियों पर कार्य करा है जिनसे गंभीर बीमारियों को दूर किया जा सकता है. परन्तु कालांतर में विदेशी आक्रमणों और अन्य पैथियों के प्रचार के कारण हम लोग अपने ज्ञान से दूर होते गए और विदेशी कंपनियों के जाल में फंसते चले गए.

आयुर्वेदिक औषधियों का सबसे प्रधान फायदा यह होता है कि यदि अच्छे चिकित्सक से इलाज़ करवाया जाय तो इनसे कोई भी नुक्सान नहीं हो सकता. एकल औषधि और कई द्रव्यों को मिलाकर बनायीं गयी औषधियां आजकल अनेक गंभीर बीमारियों में प्रयुक्त करी जा रही हैं और इन पर रिसर्च द्वारा इन्हें प्रमाणित किया जा रहा है. आज हम उन्हीं आयुर्वेदिक दवाओं की बात करने जा रहे हैं जिनके एंटीबायोटिक गुणों पर या तो रिसर्च हो चुकी है और या रिसर्च द्वारा उन्हें इन्फेक्शन कंट्रोल में उपयोगी बताया गया है. आयुर्वेद में बहुत पहले से बक्टेरिया और इन्फेक्शन्स की बात करी गयी है और अलग अलग सन्दर्भों में इनकी अपने ढंग से व्याख्या करी गयी है.

आयुर्वेद में इन्फेक्शन कंट्रोल करने के लिए जो उपाय बताए गए हैं उनको भी अब वैज्ञानिक प्रामाणिक मान चुके हैं. आयुर्वेद में सूर्योदय और सूर्यास्त को germicidal माना गया है. वातावरण के शुद्धिकरण को एक विशेष प्रक्रिया “होम विज्ञान” द्वारा करा जाता था. इस प्रक्रिया में जड़ी बूटियों को वातावरण में प्रज्वल्लित करके हवा को खतरनाक जीवाणुओं से शुद्ध किया जाता था. इन्फेक्शन को आयुर्वेद में “पित्त दुष्टि” या “रक्त दुष्टि” के समतुल्य मान सकते हैं. आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार शारीरिक दोषों को सामान अवस्था में रखकर ही इन्फेक्शन से दूर रहा जा सकता है. पित्त वर्धक पदार्थों के सेवन से बचें और पित्त शामक भोजन लें.

Important Ayurvedic Herbs and medicines which have proved effective against infections-

सामान्य रूप से, infections की चिकित्सा में आयुर्वेद में तुलसी (Ocimum sanctum), मंजिष्ठा (Rubia cordifolia), कुटकी (Picrorrhiza kurroa), नीम (Azadiracta indica), गुग्गुल (Commiphora mukul) हल्दी(Curcuma longa, commonly known as turmeric), दारुहरिद्रा (Berberis spp., commonly known as barberry), अदरख, लहसुन, वचा , कूठ आदि औषधियों का प्रयोग वर्षों से होता आ रहा है. इनमें से अधिकाँश औषधियों का स्वाद कटु अर्थात कड़वा होता है. घृतकुमारी (Aloe vera) को आसव के रूप में लेने से यह लिवर को स्वस्थ रखती है और detoxification में मदद करती है.

महासुदर्शन चूर्ण-
जिन रोगियों में ज्वर, लिवर का बढ़ जाना, थकावट आदि लक्षण होते हैं उनमें महासुदर्शन चूर्ण को उपयोगी पाया गया है.टायफायड, आँतों, फेफड़ों और मूत्राशय के इन्फेक्शन में यह उपयोगी पाया गया है. महासुदर्शन चूर्ण में कुटज प्रमुख रूप से होता है और इसमें S. aureus, S. flexneri, S. typhosa, B. subtilis नामक bacterias के विरुद्ध मज़बूत Antibacterial activity पायी जाती है. अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि महासुदर्शन चूर्ण में S. typhi, S. epidermidis, E. coli, S. aureus, K. pneumoniae, P. vulgaris and P. aeruginosa के विरुद्ध antibacterial potential होता है.

अजमोदादि चूर्ण –
अजमोदादि चूर्णके Methanol और acetone extracts में E. coli, S. aureus and P. aeruginosa, S. aureus, S. epidermidis, S. typhi, B. subtilis, E. coli and P. vulgaris के विरुद्ध antibacterial potential होता है.

महासुदर्शन क्वाथ-
Malaria और बिना कारण के होने वाले बुखार में “महासुदर्शन क्वाथ” infection समाप्त करता हैं.

पञ्चवल्कल चूर्ण-
Surgical prophylaxis में “पञ्चवल्कल चूर्ण”या इसका पेस्ट प्रयोग करते हैं. इसमें antibacterial गुण और घाव भरने की क्षमता होती है.

त्रिफला –
त्रिफला के 90% ethanolic और aqueous extracts को Staphylococcus aureus, Klebsiella sp., Pseudomonas areoginosa और Escherichia coli बैक्टीरिया पर laboratory में टेस्ट किया गया.टेस्ट के बाद यह पाया गया कि त्रिफला में इन खतरनाक बैक्टीरिया से लड़ने के लिए antimicrobial क्षमता है.
त्रिफला के औषधीय योग: त्रिफला चूर्ण, त्रिफला वटी, त्रिफलादि क्वाथ.

हल्दी -
हल्दी की पत्तियों से निकाले
हल्दी Curcuma longa व रास्ना Alpinia galanga में fungus Trichophyton longifusus को मारने की क्षमता होती है.
औषध योग –हरिद्रा चूर्ण, महारास्नादि क्वाथ

नीम –
Leptospirosis दुनिया के अनेक देशों में जानवरों से फैलने वाला घातक इन्फेक्शन है. गर्म दशों में यह एक महामारी के रूप में भी फैलता है. साथ ही जो लोग पानी से भरे स्थानों में काम करते हैं उनको इस रोग के होने की अधिक सम्भावना होती है. नीम के तेल में antibacterial और antidermatophytic गुण होने के कारण Leptospiricidal activity को शरीर में होने से रोका जा सकता है. नीम का तेल हमारी त्वचा पर antibacterial film बना देता है और शरीर में bacteria को अन्दर आने से रोक देता है.
नीम का औषध योग- पारिभद्र तेल, पञ्चनिम्बादि चूर्ण.

ब्राह्मी -
ब्राह्मी के तेल का extract gram positive Bacillus subtilis, Staphylococus aureus और gram negative Escherichia coli, Pseudomonas aeruginosa, Shigella somnei organisms के विरुद्ध Antibacterial गुण वाला होता है. ब्राह्मी (Bacopa monneri) के aerial part के Petroleum ether (60-80 Celsius) और ethanolic extracts को indian earth worms (Pheretima posthuma) पर कृमि नाशक गुणों के लिए सफलता पूर्वक प्रयोग किया जा चुका है. इस प्रयोग में albendazole और piperizine citrate को reference standards के रूप में प्रयोग किया गया था.
ब्राह्मी का औषध योग- सारस्वतारिष्ट, ब्राह्मी घृत. ब्राह्मी तेल

तुलसी –
तुलसी में पाए जाने वाले केमिकल्स के अध्ययन से पता चलता है की यह pseudomonas, staphylococcus (gram positive), Escherichia coli (gram negative) bacteria और Candida albicans fungus के विरुद्ध प्रभावशाली है.
तुलसी का औषध योग- तुलसी चूर्ण, तुलसी क्वाथ.

गिलोय/गुडूची -
गिलोय/गुडूची में anti-inflammatory, analgesic, antipyretic और immunosuppressive गुणों की खोज करी जा चुकी है. गुडूची की पत्तियों के extract में Proteus vulgaris, Staphylococcus aureus, Streptococcus pyogenes, Bacillus subtilis और Escherichia coli के विरुद्ध Antibacterial गुण होता है.
गुडूची का औषध योग-अमृतारिष्ट, अमृतादि गुग्गुल

करमर्द-
करमर्द (Carissa carandas) की पत्ती के Benzene extract में भी antibacterial गुण होते हैं.
औषध योग- करमर्द चूर्ण

त्रिफला-
त्रिफला चूर्ण में Staphylococcus epidermidis, S.aureus, Proteus vulgaris, Pseudomonas aeruginosa, Salmonella typhi के विरुद्ध Antibacterial activity पायी जाती है.

हरीतकी –
हरीतकी चूर्ण में S. epidermidis, S. aureus, B.subtilis, P.vulgaris, S.typhi, P.aeruginosa के विरुद्ध मज़बूत Antibacterial activity पायी जाती है.

बहेड़ा –
बहेड़ा चूर्ण में E.coli, S.aureus, P.aeruginosa, P.vulgaris, S.epidermidis, S.typhi, S.typhimurium के विरुद्ध मज़बूत Antibacterial activity पायी जाती है.

स्वर्ण भस्म-
Pulmonary tuberculosis में स्वर्ण भस्म का प्रयोग किया जाता है .स्वर्ण भस्म को एक अच्छा antiseptic माना जाता है और इसमें रसायन गुण यानि शरीर से व्याधि नाशक गुण होने के कारण इसका प्रयोग अनेक रोगों में किया जाता है.

सुदर्शन चूर्ण-
सुदर्शन चूर्ण में रक्त शोधक और उदर रोगों को ठीक करने की क्षमता होती है. अध्ययनों से यह साबित हुआ है की यह S.aureus, S. epidermidis, B.subtilis, S.typhimurium, E.coli, K.pneumoniae, S.typhi and P.vulgaris नामक बैक्टेरिया के विरुद्ध antibacterial कार्य करता है.

स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण –
स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण के Methanolic extract में S.aureus, B. subtilis, P. vulgaris और P. aeruginosa के विरुद्ध antibacterial गुण होते हैं.

मंजिष्ठादि चूर्ण –
मंजिष्ठादि चूर्ण आयुर्वेद में रक्त शोधक और ज्वर नाशक के रूप में उपयोग किया जाता है. अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है की यह S.epidermidis, S.aureus, B.subtilis, S. typhimurium, E. coli, P. aeruginosa, K. pneumonia, P. vulgaris, S.typhi और E.aerogenes के विरुद्ध antibacterial कार्य करता है.

दशमूल –
दशमूल चूर्ण में S.aureus, S.epidermidis, P.vulgaris, S.typhi, B.subtilis, E.coli, K.pneumonia, E. aerogenes और P.aeruginosa के विरुद्ध antibacterial potential होता है.दशमूल चूर्ण के घटक बिल्व (Aegle marmelos) में V. cholerae, E. coli and Shigella sp. के विरुद्ध antibacterial गुण होते हैं.

पिप्पलीमूल चूर्ण –
पिप्पलीमूल चूर्ण में S. aureus, S. epidermidis, E. coli, B. subtilis and P. vulgaris के विरुद्ध antibacterial गुण देखे गए हैं.

गुरुवार, 27 अगस्त 2015

चक्कर आने पर आजमाएं ये चमत्कारी उपचार

चक्कर आने पर आजमाएं ये चमत्कारी उपचार

अचानक सिर घूम जाता है। आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है। कुछ नजर नहीं आता। सारी धरती घूमती सी नजर आती है। तो, इसे आप चक्‍कर आना कहते हैं। तक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं चक्कर आने पर किये जाने वाले चमत्कारी उपचारों के बारे में।

चक्कर आने पर चमत्कारी उपचार के बारे में हम आपको बताएगें लेंकिन सब से पहले हम यह जान लेते है कि चक्कर आना किसे कहते है कभी-कभी किसी को चक्कर आते हैं, थोड़ी देर तक बैठे रहने के बाद जैसे ही उठते हैं, आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है। ऐसा लगता होगा कि आपके चारो ओर की चीजें तेजी से घूम रही हैं। यह तब होता है, जब मस्तिष्क में रक्त की पूर्ति कम हो जाती है। रक्तचाप में अचानक कमी से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है। घर में रखी चीजों द्धारा आप इस का उपचार कर सकती है। आइए जानें इन उपायों के बारें में-

चक्कर आने पर

चक्कर आने पर तुलसी के रस में चीनी मिलाकर सेवन करने से या तुलसी के पत्तों में शहद मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है।

चक्कर आने पर धनिया पाउडर दस ग्राम तथा आंवले का पाउडर दस ग्राम लेकर एक गिलास पानी में भिगो कर रख दें। सुबह अच्छी तरह मिलाकर पी लें। इससे चक्कर आने बंद हो जाते है।

सिर चकराने पर आधा गिलास पानी में दो लौंग डालकर उसे उबाल लें और फिर उस पानी को पी लें। इस पानी को पीने से लाभ मिलता है।

10 ग्राम आंवला, 3 ग्राम काली मिर्च और 10 ग्राम बताशे को पीस लें। 15 दिनों तक रोजाना इसका सेवन करें चक्कर आना बंद हो जाएगा।

जिन लोगों को चक्कर आते हैं उन्हें दोपहर के भोजन के 2 घंटे पहले और शाम के नाश्ते में फलों का जूस पीना चाहिए। रोजाना जूस पीने से चक्कर आने बंद हो जाएंगे। लेकिन ध्यान रखें कि जूस में किसी प्रकार का मीठा या मसाला नहीं डालें सदा जूस पियें। जूस की जगह चाहें तो ताजे फल भी खा सकते हैं।

नारियल का पानी रोज पीने से भी चक्कर आने बंद हो जाते है।

चाय व कॉफ़ी कम पीनी चाहिए। अधिक चाय व कॉफ़ी पीने से भी चक्कर आते हैं।

20 ग्राम मुनक्का घी में सेंककर सेंधा नमक डालकर खाने से चक्कर आने बंद हो जाते है।

खरबूजे के बीजों को पीसकर घी में भुन लें। अब इसकी थोड़ी थोड़ी मात्रा सुबह शाम लें, इससे चक्कर आने की समस्या में बहुत लाभ होता है