शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

बैड कोलेस्ट्रॉल के लिये हितकारी आहार


बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे धीरे धमनियों और शिराओं में जमना शुरू होता हैं और खून के दौरे को प्रभावित कर हृदय रोगो में बढ़ोतरी करता हैं। अगर आपके खून में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया हैं तो आपको कुछ सब्जियों का अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। ये सब्जिया ना ही सिर्फ बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करेंगी बल्कि गुड कोलेस्ट्रॉल के निर्माण में भी पूरा सहयोग देंगी। आइये जाने इन सब्जियों के बारे में।

लहसुन।
सुबह उठते ही 3-४ कच्ची लहसुन की कलियाँ चबा चबा कर खा लीजिये। लहसुन कोलेस्ट्रॉल के रोगियों के लिए किसी रामबाण से कम नहीं। इसको नित्य घर में सब्जी में बना कर या इसकी चटनी बना कर भी खायी जा सकती हैं।

अदरक।
अदरक कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में बहुत सहयोगी हैं। अनेक शोधो में पाया गया के सिर्फ 3 ग्राम अदरक का नित्य सेवन रक्त में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल का निर्माण करता हैं।

पुदीना।
पुदीने का सेवन बुरे कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में बहुत सहायक हैं, हर रोज़ 5 से 10 मि ली पुदीने का रस कोलेस्ट्रॉल के लिए रामबाण हैं।

प्याज।
हर रोज़ अगर आप आधा प्याज अपनी खुराक में शामिल करते हैं तो ये आपके बढे हुए बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर अच्छे कोलेस्ट्रोल का बढ़ाने में बहुत मददगार हैं।

लौकी।
लौकी के मौसम में सुबह खाली पेट लौकी का एक गिलास जूस पिए, इसमें पुदीना और तुलसी के ५-५ पत्ते भी मिला लीजिये, ये सिर्फ कोलेस्ट्रॉल को ही सही नहीं करेगा, बल्कि इस से आपके हृदय की धमनियों में जमा हुआ क्लॉट भी साफ़ होगा, और हृदय को भी बल मिलेगा। बाबा रामदेव ने अनेक गंभीर हृदय रोगियों को सिर्फ लौकी के इस जूस से और प्राणायाम से ही सक कर दिया था, जिनमे अनेक डॉक्टर्स भी शामिल थे।

मशरूम।
मशरूम चमत्कारिक सब्जी हैं, इसके भोजन में नियमित सेवन करने से बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता हैं।

पत्तागोभी।
पत्तागोभी एक ऐसी सब्जी हैं जो अपने गुणों के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशो में भी बहुत चर्चा की विषय रही हैं। पत्तागोभी की जितनी भी प्रजातिया पायी जाती हैं सभी के ही सेवन से गंभीर से गंभीर रोगो से छुटकारा मिल सकता हैं। पत्तागोभी का रस कैंसर, हृदय रोगो, अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि गंभीर रोगो में रामबाण हैं।

ऊपर बताई गयी सभी सब्जिया विज्ञान की कसौटी पर खरी हैं। इन सब पर अनेको अनुसन्धान हो चुके हैं। आप निश्चिन्त हो कर इनका उपयोग कर सकते हैं।

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कॉलेस्ट्रॉल से बचने के लिए क्या खाएं क्या ना खाएं


बढ़ा हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल हृदय रोगों को बुलावा देता है, ये धमनियों में एकत्र होने लगता है, और इसका मार्ग संकरा कर देता है, तंग धमनियों से उच्च रक्तचाप कि शिकायत हो जाती है, इनसे रक्त के धक्के (ब्लड क्लोटिंग) होने से दिल का दौरा पड़ने कि सम्भावना बढ़ जाती है, जो मृत्यु का कारण भी बन सकती है। इसके लिए आपको जानना चाहिए के इस रोग से बचने के लिए क्या खाए और क्या ना खाएं।

तेलों का सही बैलेंस जरूरी है। एक दिन में कुल तीन चम्मच तेल काफी है। तेल बदल-बदल कर और कॉम्बिनेशन में खाएं, मसलन सरसों, मूंगफली, नारियल, ऑलिव ऑइल और तिल का तेल बदल बदल कर इस्तेमाल करना चाहिए। रिफाइंड तेल बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। कॉम्बिनेशन और बदल-बदल कर तेल खाने से शरीर को सभी जरूरी फैट्स मिल जाते हैं।

आंवला बैड कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों में बहुत ही ज्यादा उपयोगी है, नियमित कम से कम 2 आंवलो का सेवन करें।

चुकंदर भी बैड कोलेस्ट्रॉल के लिए बहुत उपयोगी है, इसका भी नियमित इस्तेमाल करना चाहिए।

दवाओ में अर्जुन कि छाल का काढ़ा नियमित इस्तेमाल करें, चाहे आप अर्जुन का काढ़ा बनाये या फिर इसकी छाल को चाय कि तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं, इस चाय में चायपत्ती नहीं मिलानी, बाकी वैसे ही चाय बनाये, इस दवा को और कारगर बनाने के लिए आप इसमें चुटकी भर दालचीनी भी मिला कर काढ़ा या चाय बनाये।

50 ग्राम काले चने, 10 किशमिश या मुनक्का और दो बादाम रात को भिगो दें, सुबह खाली पेट इन्हें चबा चबा कर खा लें और यही पानी पी लें। इससे असामान्य रक्तचाप सामान्य हो जाता है तथा कोलेस्ट्रॉल भी सामान्य होकर हृदय शक्तिशाली हो जायेगा। यह प्रयोग लम्बे समय तक करते रहें, मधुमेह के रोगी ४ किशमिश ही लें।

ऐसी चीजें खाएं जिनमें फाइबर खूब हो, जैसे कि गेहूं, ज्वार, बाजरा, जई (जौ) आदि। दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स और दालों के फाइबर से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। आटे में चोकर मिलाकर इस्तेमाल करें।

हरी सब्जियां, साग, शलजम, बीन्स, मटर, ओट्स, सनफ्लावर सीड्स, अलसी आदि खाएं। इनसे फॉलिक एसिड होता है, जो कॉलेस्ट्रॉल लेवल को मेंटेन करने में मदद करता है।

अलसी, बादाम, बीन्स और सरसों तेल में काफी ओमेगा-थ्री होता है , जो दिल के लिए अच्छा है। अलसी के तेल को पकाना नहीं चाहिए।

मेथी , लहसुन , प्याज , हल्दी , बादाम , सोयाबीन आदि खाएं। इनसे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। एक चम्मच मेथी के दानों को पानी में भिगो लें। सुबह उस पानी को पी लें। मेथी के बीजों को स्प्राउट्स में मिला लें, उसमें फाइबर होता है।

एचडीएल यानी गुड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए रोजाना पांच-छह बादाम खाएं। इसके अलावा ओमेगा थ्री वाली चीजें अखरोट, फ्लैक्स सीड्स (अलसी के बीज) खाने चाहिए।

कॉलेस्ट्रॉल लिवर के डिस्ऑर्डर से बढ़ता है। लिवर को डिटॉक्सिफाइ करने के लिए अलोवेरा जूस, आंवला जूस और वेजिटेबल जूस लें। इन तीनों को मिलाकर रोजाना एक गिलास जूस लें। कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा है तो दिन में दो गिलास भी पी सकते हैं।

नारियल पानी पीएं। शहद ले सकते हैं क्योंकि इससे इम्युनिटी बढ़ती है।

बैड कोलेस्ट्रॉल में परहेज करें
तला-भुना खाना न खाएं। भाप में पकाकर खाना खाएं। देसी घी, डालडा, मियोनिज, बटर न लें। बिस्किट, कुकीज, मट्ठी मैदे की चीजों आदि में काफी ट्रांसफैट होता है, जो सीधा लिवर पर असर करता है। उससे बचें।

प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें। पेस्ट्री, केक, आइसक्रीम, मीट भुजिया आदि से भी परहेज करें।

फुल क्रीम दूध और उससे बना पनीर या खोया न खाएं।

उड़द दाल, नमक, और चावल ज्यादा न खाएं। कॉफी भी ज्यादा न पिएं।

नोट : खूब एक्सरसाइज करें, क्योंकि सिर्फ खाने से बहुत फायदा नहीं होता। दवाओं खासकर पेन किलर दवाओं और स्टेरॉइड क्रीम इंजेक्शन का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करें, क्योंकि इनका लिवर पर सीधा बुरा असर हो सकता है और शरीर में पानी भी रुक सकता है। स्टेरॉइड हॉर्मोंस होते हैं और इनका इस्तेमाल इनफर्टिलिटी, सर्जरी, साइनस आदि में परेशानी बढ़ने पर होता है। शराब या सिगरेट पीने से बचें। लिवर और कॉलेस्ट्रॉल के बीच सीधा संबंध है। लिवर को ठीक रखना जरूरी है क्योंकि लिवर ठीक है तो कॉलेस्ट्रॉल बढ़ेगा ही नहीं। दूसरी ओर , कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा है तो फैटी लिवर हो सकता है।

मुनक्का

1) कब्ज के रोगियों को रात्रि में मुनक्का और सौंफ खाकर सोना चाहिए। कब्ज दूर करने की यह रामबाण औषधि है।

2) भूने हुए मुनक्के में लहसुन मिलाकर सेवन करने से पेट में रुकी हुई वायु (गैस) बाहर निकल जाती है और कमर के दर्द में लाभ होता है।

3) यदि किसी को कब्ज़ की समस्या है तो उसके लिए शाम के समय 10 मुनक्कों को साफ़ धोकर एक गिलास दूध में उबाल लें फिर रात को सोते समय इसके बीज निकल दें और मुनक्के खा लें तथा ऊपर से गर्म दूध पी लें , १इस प्रयोग को नियमित करने से लाभ स्वयं महसूस करें | इस प्रयोग से यदि किसी को दस्त होने लगें तो मुनक्के लेना बंद कर दें |

4) पुराने बुखार के बाद जब भूख लगनी बंद हो जाए तब 10 -12 मुनक्के भून कर सेंधा नमक व कालीमिर्च मिलाकर खाने से भूख बढ़ती है |

5) बच्चे यदि बिस्तर में पेशाब करते हों तो उन्हें 2 मुनक्के बीज निकालकर व उसमें एक-एक काली मिर्च डालकर रात को सोने से पहले खिला दें , यह प्रयोग लगातार दो हफ़्तों तक करें , लाभ होगा |

6) मुनक्के के सेवन से कमजोरी मिट जाती है और शरीर पुष्ट हो जाता है |

7) मुनक्के में लौह तत्व Iron की मात्रा अधिक होने के कारण यह Haemoglobin खून के लाल कण को बढ़ाता हैै |

8) 4-5 मुनक्के पानी में भिगोकर खाने से चक्कर आने बंद हो जाते हैं |

9) 10 -12 मुनक्के धोकर रात को पानी में भिगो दें | सुबह को इनके बीज निकालकर खूब चबा -चबाकर खाएं , तीन हफ़्तों तक यह प्रयोग करने से खून साफ़ होता है तथा नकसीर में भी लाभ होता है |

10) 5 मुनक्के लेकर उसके बीज निकल लें , अब इन्हें तवे पर भून लें तथा उसमें कालीमिर्च का चूर्ण मिला लें | इन्हें कुछ देर चूस कर चबा लें ,खांसी में लाभ होगा |

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