शनिवार, 17 जनवरी 2015

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गुर्दे की पथरी की चिकित्सा"

गुर्दे की पथरी की चिकित्सा
"गुर्दे की पथरी की चिकित्सा"





आजकल पथरी का रोग लोगों में आम समस्या बनती जा रही है| जो अक्सर गलत खान पान की वजह से होता है।गुर्दे की पथरी (वृक्कीय कैल्कली, नेफरोलिथियासिस) (अंग्रेजी:Kidney stones) मूत्रतंत्र की एक ऐसी स्थिति है जिसमें, वृक्क (गुर्दे) के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर सदृश कठोर वस्तुओं का निर्माण होता है। गुर्दें में एक समय में एक या अधिक पथरी हो सकती है। सामान्यत: ये पथरियाँ बिना किसी तकलीफ मूत्रमार्ग से शरीर से बाहर निकाल दी जाती हैं , किन्तु यदि ये पर्याप्त रूप से बड़ी हो जाएं ( २-३ मिमी आकार के) तो ये मूत्रवाहिनी में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं। इस स्थिति में मूत्रांगो के आसपास असहनीय पीड़ा होती है।
यह स्थिति आमतौर से 30 से 60 वर्ष के आयु के व्यक्तियों में पाई जाती है और स्त्रियों की अपेक्षा पुरूषों में चार गुना अधिक पाई जाती है। बच्चों और वृद्धों में मूत्राशय की पथरी ज्यादा बनती है, जबकि वयस्को में अधिकतर गुर्दो और मूत्रवाहक नली में पथरी बन जाती है। जिन मरीजों को मधुमेह की बीमारी है उन्हें गुर्दे की बीमारी होने की काफी संभावनाएं रहती हैं। अगर किसी मरीज को रक्तचाप की बीमारी है तो उसे नियमित दवा से रक्तचाप को नियंत्रण करने पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि अगर रक्तचाप बढ़ता है, तो भी गुर्दे खराब हो सकते हैं।


गुर्दे की पथरी के कारण


किसी पदार्थ के कारण जब मूत्र सान्द्र (गाढ़ा) हो जाता है तो पथरी निर्मित होने लगती है। इस पदार्थ में छोटे छोटे दाने बनते हैं जो बाद में पथरी में तब्दील हो जाते है। इसके लक्षण जब तक दिखाई नहीं देते तब तक ये मूत्रमार्ग में बढ़ने लगते है और दर्द होने लगता है। इसमें काफी तेज दर्द होता है जो बाजू से शुरु होकर उरू मूल तक बढ़ता है।


तथा रोजाना भोजन करते समय उनमें जो कैल्शियम फॉस्फेट आदि तत्व रह जाते हैं, पाचन क्रिया की विकृति से इन तत्वों का पाचन नहीं हो पाता है। वे गुर्दे में एकत्र होते रहते हैं। कैल्शियम, फॉस्फेट के सूक्ष्म कण तो मूत्र द्वारा निकलते रहते हैं, जो कण नहीं निकल पाते वे एक दूसरे से मिलकर पथरी का निर्माण करने लगते हैं। पथरी बड़ी होकर मूत्र नली में पहुंचकर मूत्र अवरोध करने लगती है। तब तीव्र पीड़ा होती है। रोगी तड़पने लगता है। इलाज में देर होने से मूत्र के साथ रक्त भी आने लगता है जिससे काफी पीड़ा होती है। तथा लंबे समय तक पाचन शक्ति ठीक न रहने और मूत्र विकार भी बना रहे तो गुर्दों में कुछ तत्व इकट्ठे होकर पथरी का रूप धारण कर लेते हैं।




किसी प्रकार से पेशाब के साथ निकलने वाले क्षारीय तत्व किसी एक स्थान पर रुक जाते है,चाहे वह मूत्राशय हो,गुर्दा हो या मूत्रनालिका हो,इसके कई रूप होते है,कभी कभी यह बडा रूप लेकर बहुत परेशानी का कारक बन जाती है,पथरी की शंका होने पर किसी प्रकार से इसको जरूर चैक करवा लेना चाहिये.


गुर्दे की पथरी के लक्षण




पीठ के निचले हिस्से में अथवा पेट के निचले भाग में अचानक तेज दर्द, जो पेट व जांघ के संधि क्षेत्र तक जाता है। दर्द फैल सकता है या बाजू, श्रोणि, उरू मूल, गुप्तांगो तक बढ़ सकता है, यह दर्द कुछ मिनटो या घंटो तक बना रहता है तथा बीच-बीच में आराम मिलता है। दर्दो के साथ जी मिचलाने तथा उल्टी होने की शिकायत भीहो सकती है। यदि मूत्र संबंधी प्रणाली के किसी भाग में संक्रमण है तो इसके लक्षणों में बुखार, कंपकंपी, पसीना आना, पेशाब आने के साथ-साथ दर्द होना आदि भी शामिल हो सकते हैं ; बार बार और एकदम से पेशाब आना, रुक रुक कर पेशाब आना, रात में अधिक पेशाब आना, मूत्र में रक्त भी आ सकता है। अंडकोशों में दर्द, पेशाब का रंग असामान्य होना। गुर्दे की पथरी के ज्यादातर रोगी पीठ से पेट की तरफ आते भयंकर दर्द की शिकायत करते हैं। यह दर्द रह-रह कर उठता है और कुछ मिनटो से कई घंटो तक बना रहता है इसे ”रीलन क्रोनिन” कहते हैं। यह रोग का प्रमुख लक्षण है, इसमें मूत्रवाहक नली की पथरी में दर्दो पीठ के निचले हिस्से से उठकर जांघों की ओर जाता है।


गुर्दे की पथरी के प्रकार

सबसे आम पथरी कैल्शियम पथरी है। पुरुषों में, महिलाओं की तुलना में दो से तीन गुणा ज्यादा होती है। सामान्यतः 20 से 30 आयु वर्ग के पुरुष इससे प्रभावित होते है। कैल्शियम अन्य पदार्थों जैसे आक्सलेट(सबसे सामान्य पदार्थ) फास्फेट या कार्बोनेट से मिलकर पथरी का निर्माण करते है। आक्सलेट कुछ खाद्य पदार्थों में विद्यमान रहता है।
पुरुषों में यूरिक एसिड पथरी भी सामान्यतः पाई जाती है। किस्टिनूरिया वाले व्यक्तियों मेंकिस्टाइन पथरी निर्मित होती है। महिला और पुरुष दोनों में यह वंशानुगत हो सकता है।
मूत्रमार्ग में होने वाले संक्रमण की वजह से स्ट्रवाइट पथरी होती है जो आमतौर पर महिलाओं में पायी जाती है। स्ट्रवाइट पथरी बढ़कर गुर्दे, मूत्रवाहिनी या मूत्राशय को अवरुद्ध कर सकती है।


बचाव के कुछ उपाय1. पर्याप्त जल पीयें ताकि 2 से 2.5 लीटर मूत्र रोज बने।पथरी के मरीज को दिन में कम से कम 5-6 लीटर पानी पीना चाहिये। अधिक मात्रा में मुत्र बनने पर छोटी पथरी मुत्र के साथ निकल जाती है।


2. आहार में प्रोटीन, नाइट्रोजन तथा सोडियम की मात्रा कम हो।


3. ऐसे पदार्थ न लिये जांय जिनमें आक्जेलेट्‌ की मात्रा अधिक हो; जैसे चाकलेट, सोयाबीन, मूंगफली, पालक आदि


4. कोका कोला एवं इसी तरह के अन्य पेय से बचें।


5. विटामिन - सी की भारी मात्रा न ली जाय।


6. नारंगी आदि का रस (ज्यूस) लेने से पथरी का खतरा कम होता है।


पथरी में ये खाएं: 
कुल्थी के अलावा खीरा, तरबूज के बीज, खरबूजे के बीज, चौलाई का साग, मूली, आंवला, अनन्नास, बथुआ, जौ, मूंग की दाल, गोखरु आदि खाएं। कुल्थी के सेवन के साथ दिन में 6 से 8 गिलास सादा पानी पीना, खासकर गुर्दे की बीमारियों में बहुत हितकारी सिद्ध होता है।


ये न खाएं:
पालक, टमाटर, बैंगन, चावल, उड़द, लेसदार पदार्थ, सूखे मेवे, चॉकलेट, चाय, मद्यपान, मांसाहार आदि। मूत्र को रोकना नहीं चाहिए। लगातार एक घंटे से अधिक एक आसन पर न बैठें। जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं !काले अंगूरों के सेवन से परहेज करें।तिल, काजू अथवा खीरे, आँवला अथवा चीकू (सपोटा) में भी आक्सेलेट अधिक मात्रा में होता है।बैगन,फूलगोभी में यूरिक एसिड व प्यूरीन अधिक मात्रा में पाई जाती है।


पथरी का आयुर्वेद इलाज- आचार्य सुश्रुत ने अश्मरी चिकित्सा रोगाधिकार में कहा है कि पथरी में शल्य कर्म आवश्यक होता है . ऐसा बड़ी व उस पथरी के लिये कहा गया है जो मूत्र मार्ग में फंस जाती है. निम्न उपाय से पथरी के इलाज़ में काफी मदद मिलती है.


1. जिस व्यक्ति को पथरी की समस्या हो उसे खूब केला खाना चाहिए क्योंकि केला विटामिन बी-6 का प्रमुख स्रोत है, जो ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता है व ऑक्जेलिक अम्ल को विखंडित कर देता है। इसके आलावा नारियल पानी का सेवन करें क्योंकि यह प्राकृतिक पोटेशियम युक्त होता है, जो पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकता है और इसमें पथरी घुलती है।


2. कहने को करेला बहुत कड़वा होता है पर पथरी में यह भी रामबाण साबित होता है| करेले में पथरी न बनने वाले तत्व मैग्नीशियम तथा फॉस्फोरस होते हैं और वह गठिया तथा मधुमेह रोगनाशक है। जो खाए चना वह बने बना। पुरानी कहावत है। चना पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकता है।


3. गाजर में पायरोफॉस्फेट और पादप अम्ल पाए जाते हैं जो पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकते हैं। गाजर में पाया जाने वाला केरोटिन पदार्थ मूत्र संस्थान की आंतरिक दीवारों को टूटने-फूटने से बचाता है।


4. इसके अलावा नींबू का रस एवं जैतून का तेल मिलकर तैयार किया गया मिश्रण गुर्दे की पथरी को दूर करने में बहुत हीं कारगर साबित होता है। 60 मिली लीटर नींबू के रस में उतनी हीं मात्रा में जैतून का तेल मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें। इनके मिश्रण का सेवन करने के बाद भरपूर मात्रा में पानी पीते रहें।
इस प्राकृतिक उपचार से बहुत जल्द हीं आपको गुर्दे की पथरी से निजात मिल जायेगी साथ हीं पथरी से होने वाली पीड़ा से भी आपको मुक्ति मिल जाएगी।


5. पथरी को गलाने के लिये अध उबला चौलाई का साग दिन में थोडी थोडी मात्रा में खाना हितकर होता है, इसके साथ आधा किलो बथुए का साग तीन गिलास पानी में उबाल कर कपडे से छान लें, और बथुये को उसी पानी में अच्छी तरह से निचोड कर जरा सी काली मिर्च जीरा और हल्का सा सेंधा नमक मिलाकर इसे दिन में चार बार पीना चाहिये, इस प्रकार से गुर्दे के किसी भी प्रकार के दोष और पथरी दोनो के लिए साग बहुत उत्तम माने गये है।


6. जीरे को मिश्री की चासनी अथवा शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है। इसके अलावा तुलसी के बीज का हिमजीरा दानेदार शक्कर व दूध के साथ लेने से मूत्र पिंड में फ़ंसी पथरी निकल जाती है।


7. एक मूली को खोखला करने के बाद उसमे बीस बीस ग्राम गाजर शलगम के बीज भर दें, फ़िर मूली को गर्म करके भुर्ते की तरह भून लें, उसके बाद मूली से बीज निकाल कर सिल पर पीस लें,सुबह पांच या छ: ग्राम पानी के साथ एक माह तक पीते रहे, पथरी में लाभ होगा|


8. प्याज में पथरी नाशक तत्व होते हैं। करीब 70 ग्राम प्याज को अच्छी तरह पीसकर या मिक्सर में चलाकर पेस्ट बनालें। इसे कपडे से निचोडकर रस निकालें। सुबह खाली पेट पीते रहने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।


9. पहाडी कुल्थी और शिलाजीत दोनो एक एक ग्राम को दूध के साथ सेवन करने पथरी निकल जाती है


10. एक मूली को खोखला करने के बाद उसमे बीस बीस ग्राम गाजर शलगम के बीज भर दें,फ़िर मूली को गर्म करके भुर्ते की तरह भून लें,उसके बाद मूली से बीज निकाल कर सिल पर पीस लें,सुबह पांच या छ: ग्राम पानी के साथ एक माह तक पीते रहे,पथरी और पेशाब वाली बीमारियों में फ़ायदा मिलेगा।


11. सूखे आंवले को नमक की तरह से पीस लें,उसे मूली पर लगाकर चबा चबा कर खायें,सात दिन के अन्दर पथरी पेशाब के रास्ते निकल जायेगी,सुबह खाली पेट सेवन करने से और भी फ़ायदा होता है।


12. तुलसी के बीज का हिमजीरा दानेदार शक्कर व दूध के साथ लेने से मूत्र पिंड में फ़ंसी पथरी निकल जाती है।


13. पखानबेद नाम का एक पौधा होता है! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है! उसके पत्तों को पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म!! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती


14. बथुआ को पानी में उबालकर इसके रस में नींबू, नमक व जीरा मिलाकर नियमित पीने से पेशाब में जलन, पेशाब के समय दर्द तथा पथरी दूर होती है।


16. पथरी से बचाव के लिये रातभर मक्के के बाल (सिल्क) को पानी में भिगाकर सुबह सिल्क हटाकर पानी पीने से लाभ होता है। पथरी के उपचार में सिल्क को पानी में उबालकर बनाये गये काढे का प्रयोग होता है।


17. आम के ताजा पत्ते छाया में सुखाकर, बारीक पीस कर आठ ग्राम मात्रा पानी मे मिलाकर प्रात: काल प्रतिदिन लेने से पथरी समाप्त हो सकती है।


18. दो अन्जीर एक गिलास पानी मे उबालकर सुबह के वक्त पीयें। एक माह तक लेना जरूरी है।





19. कुलथी की दाल का सूप पीने से पथरी निकलने के प्रमाण मिले है। २० ग्राम कुलथी दो कप पानी में उबालकर काढा बनालें। सुबह के वक्त और रात को सोने से पहिले पीयें।एक-दो सप्ताह में गुर्दे तथा मूत्राशय की पथरी गल कर बिना ऑपरेशन के बाहर आ जाती है, लगातार सेवन करते रहना राहत देता है।
कुल्थी का पानी विधिवत लेने से गुर्दे और मूत्रशय की पथरी निकल जाती है और नयी पथरी बनना भी रुक जाता है। किसी साफ सूखे, मुलायम कपड़े से कुल्थी के दानों को साफ कर लें। किसी पॉलीथिन की थैली में डाल कर किसी टिन में या कांच के मर्तबान में सुरक्षित रख लें।


कुल्थी का पानी बनाने की विधि: किसी कांच के गिलास में 250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुल्थी डाल कर ढक कर रात भर भीगने दें। प्रात: इस पानी को अच्छी तरह मिला कर खाली पेट पी लें। फिर उतना ही नया पानी उसी कुल्थी के गिलास में और डाल दें, जिसे दोपहर में पी लें। दोपहर में कुल्थी का पानी पीने के बाद पुन: उतना ही नया पानी शाम को पीने के लिए डाल दें।इस प्रकार रात में भिगोई गई कुल्थी का पानी अगले दिन तीन बार सुबह, दोपहर, शाम पीने के बाद उन कुल्थी के दानों को फेंक दें और अगले दिन यही प्रक्रिया अपनाएं। महीने भर इस तरह पानी पीने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी धीरे-धीरे गल कर निकल जाती है।


20. स्टूल पर चढकर १५-२० बार फ़र्श पर कूदें। पथरी नीचे खिसकेगी और पेशाब के रास्ते निकल जाएगी। निर्बल व्यक्ति यह प्रयोग न करें।


21. दूध व बादाम का नियमित सेवन से पथरी की संभावना कम होती है।


22. गोखरू 10 ग्राम, जल 150 ग्राम, दूध 250 ग्राम को पकाकर आधा रह जाने पर छानकर नित्य पिलाने से मूत्र मार्ग की सारी विकृतियाँ दूर होती हैं ।


23. गिलास अनन्नास का रस, १ चम्मच मिश्री डालकर भोजन से पूर्व लेने से पिशाब खुलकर आता है और पिशाब सम्बन्धी अन्य समस्याए दूर होती है


24. पथरी होने पर नारियल का पानी पीना चाहिए।इसमें जैविक परमाणु होते हैं जो खनिज पदार्थो को उत्पन्न होने से रोकते हैं .


25. 15 दाने बडी इलायची के एक चम्मच, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम दो बार पीने से पथरी निकल जाती है।


26. पका हुआ जामुन पथरी से निजात दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पथरी होने पर पका हुआ जामुन खाना चाहिए।

27. सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे की पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है।


28. मिश्री, सौंफ, सूखा धनिया लेकर 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर डेढ लीटर पानी में रात को भिगोकर रख दीजिए। अगली शाम को इनको पानी से छानकर पीस लीजिए और पानी में मिलाकर एक घोल बना लीजिए, इस घोल को पी‍जिए। पथरी निकल जाएगी।


29.तीन हल्की कच्ची भिंड़ी को पतली-पतली लम्बी-लम्बी काट लें। कांच के बर्तन में दो लीटर पानी में कटी हुई भिंड़ी ड़ाल कर रात भर के लिए रख दें। सुबह भिंड़ी को उसी पानी में निचोड़ कर भिंड़ी को निकाल लें। ये सारा पानी दो घंटों के अन्दर-अन्दर पी लें। इससे किड़नी की पथरी से छुटकारा मिलता है।


30. महर्षि सुश्रुत के अनुसार सात दिन तक गौदुग्ध के साथ गोक्षुर पंचांग का सेवन कराने में पथरी टूट-टूट कर शरीर से बाहर चली जाती है । मूत्र के साथ यदि रक्त स्राव भी होतो गोक्षुर चूर्ण को दूध में उबाल कर मिश्री के साथ पिलाते हैं ।
तोड़ना । लिथोट्रिप्सी बिना शल्य क्रिया के पथरी को तोड़कर छोटे-छोटे टुकड़ो के रुप में शरीर से बाहर निकालने की आसान व सुरक्षित विधि है ।





सहायक उपचार- हिमालय ड्रग कंपनी की सिस्टोन की दो गोलियां दिन में 2-3 बार प्रतिदिन लेने से शीघ्र लाभ होता है। कुछ समय तक नियमित सेवन करने से पथरी टूट-टूट कर बाहर निकल जाती है। यह मूत्रमार्ग में पथरी, मूत्र में क्रिस्टल आना, मूत्र में जलन आदि में दी जाती है।स्टोनिल कैप्सूल( हकीम हाशमी )एक 100% हर्बल जड़ी बूटी युक्त उपाय अपने को पूरी मूत्र प्रणाली के लिए एक टॉनिक के रूप में दोनों स्वस्थ और रोगग्रस्त गुर्दे के कामकाज और कार्य में सुधार करने की क्षमता के लिए जाना जाता है. यह हर्बल कैप्सूल गुर्दे में पत्थर गठन के एक आम स्वास्थ्य विकार, जो दुनिया में लोगों की काफी संख्या को प्रभावित करता है. उसका उपचार में सहायता करता है यह मुख्य रूप से कैल्शियम का संचय, फॉस्फेट, और गुर्दे में oxalate जो क्रिस्टल या पत्थर को निश्चित रूप से निकल बहार करता है .


आपको गुर्दे की पथरी जिन्हें बार-बार हो रही है उन्हें खान-पान में परहेज बरतना चाहिए, ताकि समस्या से बचा जा सकता है। साथ ही एक स्वस्थ व्यक्ति को तो प्रतिदिन 3-5 लीटर पानी पीना चाहिए| यदि किसी को एक बार पथरी की समस्या हुई, तो उन्हें यह समस्या बार-बार हो सकती है। अतः खानपान पर ध्यान रखकर पथरी की समस्या से निजात पाई जा सजा सकती हे।

शनिवार, 17 मई 2014

बाल झडऩे को रोकना /खालित्य- पालित्य चिकित्सा



कम उम्र में सिर के बाल उडऩा बहुत टेंशन देने वाली प्रॉब्लम है वर्तमान समय ये समस्या युवाओं में बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण हेरीडिटी, हार्मोनल कारण या खानपान व दिनचर्या के साथ ही धूप में रहने से व पोषक तत्वों की कमी से भी बाल सफेद होते हैं लेकिन बालों की ठीक से देखभाल न करना भी बाल झडऩे का एक बड़ा कारण है। ये एक ऐसी समस्या है जिससे उम्र बहुत अधिक दिखने लगती है। इसे दूर करने के लिए अधिकतर लोग कई तरह के तैल व शैंपू का उपयोग करते हैं। लेकिन तेल व शैंपू बालों को स्वस्थ नहीं बना सकते हैं। अगर आप समय से पहले गंजे नहीं होना चाहते तो नीचे लिखे उपाय अपनाएं।

- अगर आपको बार-बार कंघी करने की आदत है तो संभल जाइए। अधिकतर लोग अपने बालों को सुलझा और संवरा दिखाने के लिए बालों को बार-बार कंघी करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग ये जानते हैं कि बार-बार बालों को कंघी करने से बाल डेमेज होते हैं।कंघी करना भी एक बहुत कम अंतराल पर बालों में कंघी न करें इससे बाल ज्यादा तैलीय हो जाते हैं।

- बार-बार बालों को धोने से भी बालों को नुकसान पहुंचता है। अधिकांश लोग अपने बालों को सुंदर व सेहतमंद दिखाने के लिए बार-बार और ज्यादा केमिकल्स वाले शैम्पू का यूज करते हैं बल्कि बालों को धोने के लिए आंवला व अरीठा पाउडर का यूज सबसे अच्छा रहता है। इसके अलावा अगर बालों को धोने के लिए कम केमिकलस वाले शैम्पू का यूज करें।आपके बाल तैलीय हैं तो कंडीशनर का इस्तेमाल न करें।

- कम से कम सप्ताह में एक दिन शंखपुष्पी से बना हुआ असली और शुद्ध चूर्ण थोड़े से पानी में मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं। इसके अलावा भृंगराज के चूर्ण में थोड़ा तिल मिलाकर खाएं। इस आयुर्वेदिक ट्रिटमेंट से आपके बाल प्राकृतिक रूप से स्वस्थ एवं मजबूत बनेंगे। प्रोटीन से भरपूर चीजों का सेवन अधिक करें इससे हेयर फॉलिकल्स मजबूत होते हैं।

- शैम्पू करने से पहले बालों को ड्राय रखने से भी बाल झडऩे लगते हैं इसीलिए शैम्पू करने से पहले बालों में हल्के गर्म ऑलिव ऑयल या कोकोनट ऑयल से मसाज करें। बालों की जड़ों में तेल की अच्छे से मसाज रात को सोने पहले ही कर लेना चाहिए। इससे न सिर्फ बालों की जड़े मजबूत होती है बल्कि बालों शाइन भी करने लगती है।

- बालों का सीधा संबंध पेट से होता है। यदि पाचन तंत्र और हाजमा ठीक नहीं है तो बालों की जड़ें कमजोर होंगी लगातार कब्ज रहने से हेयर फालिकल्स कमजोर हो जाते है बाल टूटने व झडऩे लगते हैं। इसलिए अपने खान-पान और हाजमे को हमेशा ठीक रखें।चाय, कॉफी, पान-तंबाकू, मिर्च-मसाले आदि नशीले पदार्थों से दूर ही रहें।

चिकित्सा---
*Amalki rasayan-100g
Saptamrat loh-20g
Mukta shukti bhasm-10g
Giloy  sat-10g
100 mg smrtisagar ras
1month course fr hairfall


*Trifla1kg
Bhringraj500gm
kala til500gm
Pure honey500ml
Go grit300gm
sabhee mix kere
Dose10,10gm cow milk
Se de
Indralupt aclopasia me
Atyantlabhkari h


*Ganj p dhaniya svaras kalep karaye


*Shir m dandruff  ho to takr m amalki churn bhigo Kar lagae

*Methi churn Ko dahi me bhigo kr lagane se bhi Bal jharne km hote h.


*गुडहल के फूलो की मालिश --खालित्य पालित

*खालित्य- पालित्य-खोरा (Dandruff)--जूँऐं---आमतौर पर ये रोग बालों में होते हैं। ताजा एल्युवीरा (ग्वारपाठा) की गिरी का रस नहाने से 1घंटे पहले बालों में लगाया जाए और फिर त्रिफला,भृंगराज,शिकाकाई (रात भर भिगोने के बाद) से सिर धोकर ऐरण्ड तैल लगाया जाऐ (3-4 माह) या आवशायकतानुसार व हरी सब्जियाँ,सलाद, अधिक जल का सेवन,सुखद निद्रा,खुश दिमाग--तो इन रोगों से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।
मिथ्याहार-विहार,चिंता,अनिद्रा,विबन्ध,क्रोध इन रोगों के मुख्य कारण हैं।

*Sarshap Tel v goghrit ka nasy  de


*Nariyal  oil-1spn
Dahi-4spn
Neebu-1spn
Tankan bhasm-1spn
1hr before  bath  Gud  fr  dandruff

*Hathee dant ka burada5gm
Rasont5gm
goat milk20ml
Ye1matra he
Trifla powder se shampoo
Ker dhove baad me
Sir per lep legave khalitya
Nashk he
One month tk lagave


*घृतकुमारी स्वरस 1-itr
भृंगराज स्वरस     1-ltr
आमलकी स्वरस  1-ltr
ऐरण्डतैल         1÷2 ltr
नारियलतैल        1÷2ltr
सरसों तैल           1÷2ltr
कल्क द्रव्य---''
अरीठा  100ग़ाम
मेहंदीपत्र 100ग्राम
काॅफी पाउडर 20ग्राम
अगर तगर जटामासी ब्राहमी प्रत्येक20--20 ग्राम
तक्र  1- ltr
सब कोने मिला लोहे की कढ़ाई में एक रात्री रख देवे।दूसरे दिन मंद आच पर पकाते हुए तैल सिद्ध करे।
यह तैल केश संबन्धित अनेक व्याधियो कोने दूर कर बालों कारणों पोषण करते हुए सुन्दर घना बनाता है।अकाल खालित्य को दूर करता है।
             
*श्वेत हेयर

भृन्गराज200gm

काले तिल250gm
 आंवला 250 gm
निलिनी 250gm
मेहंदी 1 kg

रिठा 200gm
शिकाकाई 250gm
मेथी  250gm
कत्था 100 gm

इन सभी को कूट पीसकर रखले

ओर कुछ मात्रा लोह पात्र मे   पानी मे भिगो दे

अगले दिन लगाए 
कुछ महीनो  मे पहले ब्राउन फिर हेयर ब्लैक होने लगेंगे
मेरा अनुभूत है।



*बालो की समस्या का सटिक ईलाज*
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🔵टकली पर भी बाल उगाने  वाला वह सफेद बालो को काला करने वाला पतले बेजान बाल मे नयी जान लाने वाला चमत्कारी तैल🔵
👉🏻आवला-15gm
👉🏻जटामासी-200 mg
👉🏻ईन्द्रायन बीज-6gm
👉🏻अन्नंतमूल-4gm
👉🏻सुगन्धंबाला-200 mg
👉🏻कपुर कचरी100 mg
👉🏻भागरा-6gm
👉🏻दारू हल्दी-6.gm
👉🏻शंख पुष्पी-800mg
👉🏻तिल ऑईल-200gm

सब सामग्री को मिक्स करके तैल मे उबाले।ठण्ड़ा होने पर बोतल मे भर दे
इस तैल से गंजेपन वाले भाग पर सुबह शाम नियमित रूप से 3 महीने तक मालिश करने से गंजेपन मे भी बाल आ जाएगे।ओर बालो की हर समस्या से मुक्ति मिलेगी101 %
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☘  अक्सर महिलाऐ ज्यादा बालो की समस़्या से परेशान रहती है.
उन सब समस्या के लिये कोई ना कोई कारन जिम्मेदार होता है.

⭕ *बाल गिरने के कारण* ⭕
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☘ विटामिन्स मिनरल्स की कमी, बालो मे केमिकल युक्त  तेल  डालने से ,पालॅर मे बालो को रगवाने से,स्टेट करवाने से, केमिकल युक्त. शेम्पु  के  कारन  कुपोषण , विटामिन-A, विटामिन -C, विटामिन -B की कमि , हिमोग्लोबिन की कमि , पित्त दोष , वात दोष , वात-पित्त दोष , किसी अन्य बिमारी के कारन , मानसिक टेन्शन के कारन , चिंता के कारन , अनियमित मासिक के कारन , थाईराईड , या अन्य बडे रोग के कारन भी बाल गिर सकते है.

⭕ *बालो की समस्या* ⭕
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👉 बालो का गीरनां ,टकला होना,बालो के बीच मे से चमड़ी दीखना,बालो का तूटनां , दो मूहै बाल , बेजान बाल , बालो का ग्रोथ ना होना , यह समस्या से काफी परेशान महिलाऐ होती है.

☘ *बालो के लिऐ हैर पैक* ☘
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👉 भुंगराज.     50  GMs
👉 ञिफला      100 GMs
👉 बाम्ही          50 GMs
👉 मुलेठी         50 GMs

☘ उपर बताई गई चिजो का चूरन बनाकर हर विक मे १ बार बालो मे छाश ( बटर मिल्क ) मे मिलाकर लेप करे

⭕ *बालो के लिऐ खाने की आैषधि*⭕
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👉 आंवला      100 GMs    
👉 मुलेठी          50 GMs
👉 शतावर जड  50 GMs
👉 शंख भस्म    10 GMs
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☘ उपर दि गई चिजो को मिक्स करके सुबह शाम आधा-आधा  चमच लिजिऐ


वजन घटाएं

कुछ उपाय जो वजन घटाएं

पूरी नींद यानी पूरी सेहत

पर्याप्त नींद और तनाव का गहरा ताल्लुक है। कई शोध नींद और वजन के संबंधों के बारे में इशारा करते हैं। इनमें पाया गया है कि बहुत कम या बहुत अधिक नींद से वजन बढ़ने लगता है। अच्छी नींद लेने वाला व्यक्ति न सिर्फ तनाव मुक्त रहता है बल्कि मोटापा कम करने में भी मदद मिलती है।

वॉकिंग- उठाइए सेहत के कदम

पैदल चलने से शरीर की मांसपेशियों की अच्छी कसरत हो जाती है। कड़ी कसरत के 90 फीसदी फायदे मिल जाते हैं। अगर आप जिम नहीं जाना चाहते हैं, और भारी-भरकम वजन उठाना आपको पसंद नहीं, तो आप पैदल चलकर भी कसरत के फायदे पा सकते हैं। एक मील यानी करीब 1.6 किलोमीटर पैदल चलने से 100 कैलोरी तक बर्न होती हैं। हफ्ते में अगर तीन दिन दो-दो मील की वॉक करें तो हर तीसरे हफ्ते आधा किलो वजन कम हो सकता है।

जल है तो जीवन है

पानी हमारे शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में बहुत मददगार होता है। जिससे आपका मेटाबोलिज्म तेज हो जाता है और आपका वजन कम होने लगता है। इसलिए दिन में कम से कम 10-12 गिलास पानी जरुर पियें। कई शोधों में माना गया है कि दिन में आठ से नौ गिलास पानी से 200 से 250 कैलोरी आप बर्न कर सकते है।

चबा चबाकर खाएं

खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि खाना देर तक खाएंगे। कम खाना खा पाएंगे और इससे वजन भी नहीं बढ़ेगा। यानी बहुत देर तक लगातार खाने से आपकी भूख मर जाएगी। चबाकर खाने से खाना जल्दी पच जाता है और आपको बहुत ज्यादा देर तक भूख नहीं लगती।

फलों का रस

फलों के रस में यदि ऊपर से चीनी न मिलाई गई हो, तो वजन घटाने का यह बेहद कारगर उपाय होता है। सॉफ्ट ड्रिंक, कोल्ड ड्रिंक जैसे पेय पदार्थों से जहां वजन बढ़ता है वही दूध, पानी, नारियल पानी, जूस इत्यादि वजन कम करने में लाभकारी होते हैं।

सेब जिसने खाया, वजन घटाया

सेब में कैलोरी बहुत कम होती है। इसमें मौजूद पेक्टिन नामक फाइबर एलडीएल कोलेस्ट्रोल या संतृप्त वसा के स्तर को नियंत्रित करता है। दिन में दो बार सेब का सेवन करने वाले लोग अपना 16 प्रतिशत कोलेस्ट्रोल कम कर सकते हैं जो वजन घटाने में सहायक होता है।

*दर्द में ये तेल घरपर बनाकर लगाएं और देखें कमाल*

       *दर्द में ये तेल घरपर बनाकर लगाएं और देखें कमाल*

अगर आप जोड़ो के दर्द,पसलियों के दर्द या ठंड में किसी अन्य तरह के दर्द से परेशान हैं तो अजवाइन से बेहतर कोई औषधि नहीं है।अजवाइन को आयुर्वेद में कई बीमारियों की एक दवा माना गया है। अजवाइन गैस व कफ के रोगों को दूर करनेवाली है, दर्द, वायुगोला आदि रोगों का नाश करती है। आचार्य चरक के अनुसार अजवाइन दर्द को मिटाने वाली व भूख बढ़ाने वाली है। आचार्य सुश्रुत ने अजवाइन को दर्द निवारक व पाचक माना है। प्रसूता स्त्री के शरीर पर अजवाइन का चूर्ण मलने से प्रसव के कारण हुई शारीरिक पीड़ा दूर हो जाती है। कैसा भी जोड़ो का दर्द हो अगर उस पर अजवाइन
का तेल बनाकर लगाया जाए तो दर्द में बहुत जल्दी राहत मिलती है। 10 ग्राम अजवाइन का तेल 10 ग्राम पिपरमेंट और 20 ग्राम कपूर तीनों को मिलाकर एक बोतल में भर दें। दर्द या कमरदर्द या पसलीदर्द, सिरदर्द आदि में तुरंत लाभ पहुंचानेवाली औषधि है। इसकी कुछ बूंदे मलिए, दर्द छूमंतर हो जाएगा। अजवाइन के तेल की मालिश करने से जोड़ों का दर्द जकडऩ तथा शरीर के अन्य भागों पर भी मलने से दर्दमें राहत मिलती है।

शनिवार, 30 मार्च 2013

treatment for back pain



Treat your back with care – Ayurveda treatment for back pain


Spondylitis is one of the major postural problems all around the world.  As there is increasing number of people spending time sitting  with  laptops, i pads  and television more and more number of Spondylitis cases are seen. Spondylitis   is a type of arthritis that affects joints in the spine. The patient feels a pain and stiffness a shooting in the low back area and sensation of pain. The stiffness is felt especially early in the morning or after periods of inactivity.
Spondylitis is an inflammatory disease that involves the joints of the spine and primarily seen in young adults. It is more generally seen in men than in women. Spondylitis runs in families.  Commonly seen are cervical spondylitis and lumbar spondylitis. In cervical Spondylitis   person feels severe neck pain, headache and stiffness . In lumbar Spondylitis there will be Pain in the lower back that worsens during morning.
Ayurveda can treat spondylitis in safe and simpler way. There are three principles for the Spondylitis treatment in Shathayu Ayurveda:
  1. Reduction of the inflammation in tissues – Panchakarma treatments
  2. Increasing blood circulation in that area – External application like massages
  3. Correction of the calcium metabolism – Internal medication
Severe and chronic cases of Spondylitis require Panchakarma treatments, but in acute and fresh cases only medicines too work well.
DIET
  • Nutritious food to be taken
  • Avoid sour curds, deep fried, oily, carbohydrate rich foods
  • Avoid alcohol
  • Eat plenty of vegetables, fruits, and whole-grain products
  • Drink 8-10 glasses of water a day
  • Bitter vegetables like bitter variety of drumstick, neem flowers and bitter gourd are very useful
  • Wheat is better than rice for the patient
  • Maintaining ideal weight
HOME REMEDIES FOR SPONDYLITIS
  • Oil prepared from garlic and rubbed on the affected part will give great relief. This oil is prepared by frying 10 cloves of garlic in 60 grams of oil in a frying pan. They should be fried slowly till they are brown. After it is cooled, it should be applied vigorously on the affected part and allowed to remain there for three hours. The patient may thereafter have a warm bath. This treatment should be continued for at least 15 days.
  • The patient should avoid fatty, spicy and fried foods, sour curd, sweets, sugar, condiments as well as tea and coffee (at least to some extent)
  • Relief from pain can be obtained by taking lemon juice mixed with common salt twice or thrice daily
  • Keep all affected joints mobile
  • The back exercises are recommended to reduce the pain
  • Keep good posture and avoid curvature of the spinal cord
  • Avoid permanent sedentary for long periods

चेहरे के दाग-धब्बे और झाइयां हटाने के लिए

चेहरे के दाग-धब्बे और झाइयां हटाने के लिए हल्दी और काले तिल को बराबर मात्रा में पीसकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। हल्दी-दूध का पेस्ट लगाने से त्वचा का रंग निखरता है और आपका चेहरा खिला-खिला लगता है।