शनिवार, 21 मई 2016

खरबूजे खाने के फायदे..

गर्मियों में खरबूजे खाने के अनोखे फायदे..

गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की अक्सर कमी हो जाती है जिसे खरबूजा खाकर काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही ये लू से भी बचाता है। इसके साथ ही खरबूजा खाकर आपको कितने तरह के फायदे हो सकते हैं, आइए जानते हैं।

कैंसर से करे बचाव

खरबूजे में बड़ी मात्रा में आर्गेनिक पिगमेंट केरोटेन्वाइड पाया जाता है, जो कैंसर से बचाने के साथ ही लंग कैंसर की संभावना को भी कम करता है। यह शरीर में पनप रहे कैंसर के मूल को नष्ट कर देता है।

पाचन के लिए अच्छा

खरबूजे से शौच की समस्या भी दूर होती है। अगर आप पाचन की समस्या से जूझ रहे हैं, तो खरबूजा खाइए। इससे शौच की समस्या दूर हो जाएगी। खरबूजे में मौजूद पानी की मात्रा पाचन में सहायक होती है। इसमें पाए जाने वाले मिनरल्स पेट की एसीडीटी को खत्म करते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया दुरुस्त रहती है।

ऊर्जा को बढ़ाता है

अधिकतर खरबूज में विटामिन ‘बी’ पाया जाता है। विटामिन ‘बी‘ शरीर में ऊर्जा के निर्माण में सहायक होता है। सूगर और कार्बोहाइड्रेट को संसाधित करने में यह ऊर्जा शरीर के लिए आवश्यक होती है।

किडनी को स्वस्थ बनाए रखता है

खूरबूजे में डाइयुरेटिक (मूत्रवर्धक) क्षमता काफी अच्छी होती है। इस कारण इससे किडनी की बीमारियां ठीक होती हैं और यह एक्जिमा को कम करता है। अगर खरबूजे में नींबू मिलाकर इसका सेवन किया जाए तो इससे गठिया की बीमारी भी ठीक हो सकती है।

त्वचा को बनाएं जवान

खरबूजे में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी व विटामिन ए पाया जाता है। इसीलिए इसके नियमित सेवन से त्वचा जवां बनी रहती है।

तनाव से मुक्ति दिलाता है

खरबूजे में काफी मात्रा में पोटैशियम मौजूद होता है। पोटेशियम दिल को सामान्य रूप से धड़कने में मदद करता है, जिससे मस्तिष्क में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है।

चेहरा चमकने लगता है

स्किन में कनेक्टिव टिशू पाए जाते हैं। खरबूजे में पाया जाने वाले कोलाजन प्रोटीन इन कनेक्टिव टिशू में कोशिका की संरचना को बनाए रखता है। कोलाजन से जख्म भी जल्दी ठीक होते हैं और त्वचा को मजबूती मिलती है। अगर आप लगातार खरबूजा खाएंगे तो चेहरा चमकने लगेगा।

दिल को सुरक्षित रखता है

खरबूजे में एडेनोसीन नामक एंटीकोएगुलेंट पाया जाता है, जो ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है और खून का थक्का नहीं जमने देता है। इसीलिए इसके नियमित सेवन से दिल से संबंधित बीमारियां दूर ही रहती हैं।

डायबिटीज में भी है फायदेमंद

डायबिटीज के रोगियों के लिए खरबूजा बहुत फायदेमंद होता है। माना जाता है कि जो डायबिटीज रोगी गर्मी में रोज एक गिलास खरबूजे का जूस लेते हैं, उनका कोलेस्ट्राल हमेशा कंट्रोल में रहता है।

आंखें भी रहती हैं सुरक्षित

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन ‘ए’ की आवश्यकता होती है। खरबूजा यह विटामिन बीटा-कारोटीन के रूप में उपलब्ध कराता है। डब्ल्यूएचएफ के अनुसार रोज तीन बार उच्च बीटा-कारोटीन फल खाने से मैकुलर डीजेनेरेशन का खतरा 1.5 बार खाने वालों की तुलना में 36 प्रतिशत कम हो जाता है। मैकुलर डीजेनेरेशन ढलती उम्र के साथ होने वाली समस्या है, जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

वजन कम करने में होता है मददगार

जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें गर्मी में रोज खरबूजे का सेवन करना चाहिए। इसमें काफी कम मात्रा में सोडियम पाया जाता है। साथ ही, यह फैट और कोलेस्ट्रोल से भी मुक्त होता है। इसमें कम मात्रा में कैलोरी होती है। एक कप खरबूजे में सिर्फ 48 कैलोरी ऊर्जा होती है। इसीलिए यह बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में काफी मददगार होता है।

सावधानियां

खाना खाने से एकदम पहले या एकदम बाद में खरबूजा नहीं खाना चाहिये। खरबूजा और दूध एक साथ नहीं लेना चाहिए। खरबूजा और दूध एक साथ लेने से हैजा हो सकता है।

बुधवार, 18 मई 2016

हरे धनिया

हरे धनिये की थोड़ी-सी पत्तियां कई बीमारियों को दूर करने में इफेक्टिव हैं। अगर गर्मी के दिनों में लू लग जाए तो इसका जूस पीने से राहत मिलती है। ऐसे ही इसके और भी कई फायदे हैं। जानते हैं इसके 13 फायदों के बारे में...

मंगलवार, 17 मई 2016

सोमवार, 16 मई 2016

चंदन

चंदन की पैदावार तमिलनाडु, मालाबार और कर्नाटक में अधिक होती है। इसका पेड़ सदाबहार और 9 से 12 मीटर तक ऊंचा होता है। बाहर से इसकी छाल का रंग मटमैला और काला और अन्दर से लालिमायुक्त लंबे चीरेदार होता है। इसके तने के बाहरी भाग में कोई गंध नहीं होती है जबकि अन्दर का भाग सुगन्धित और तेल युक्त होता है। चंदन के पत्ते अण्डाकार तथा 3 से 6 सेमी तक लम्बे होते हैं। इसके फूल गुच्छों में छोटे-छोटे पीलापन लिए हुए, बैंगनी रंग के तथा गंधहीन होते हैं। चंदन के फल छोटे-गोल, मांसल और पकने पर बैंगनी रंग के तथा बिना किसी गंध के होते हैं। आमतौर पर चंदन में फूल और फल की बहार जून से सितम्बर और नवम्बर से फरवरी तक आती है। चंदन के पेड़ की आयु लगभग 50 वर्ष होती है। चंदन 5-6 प्रकार का होता है जिसमें सफेद लाल, पीत (पीला), कुचंदन (पतंगों) के रंगों के आधार पर जाने जाते हैं। उत्तम चंदन स्वाद में कटु घिसने पर पीला ऊपर से सफेद काटने में लाल, कोटरयुक्त और गांठदार होता है।

विभिन्न रोगों में उपयोग :

1. शरीर की जलन :
चंदन और कपूर को घिसकर शरीर पर लेप करने से शरीर की जलन दूर हो जाती है।
हाथ-पैरों की जलन को दूर करने के लिए सरसों का तेल या चंदन के तेल की मालिश करें।

2. खुजली :
चंदन के तेल को नींबू के रस में मिलाकर लेप करने से खुजली समाप्त हो जाती है।
दूध के अन्दर चंदन या नारियल का तेल और कपूर मिलाकर लगाने से खुजली दूर हो जाती है।

3. मूत्रकृच्छ और रक्तातिसार: चंदन को चावल के पानी में घिसकर शहद और शक्कर के साथ पीने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) और रक्तातिसार (खूनी दस्त) मिट जाता है।
4. मूत्र रोग: लगभग 8 से 10 बूंद चंदन का तेल बताशे में डालकर एक कप दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पेशाब की जलन, पेशाब में पीप आना बंद हो जाती है।
5. शरीर पर गर्मी से उत्पन्न फुंसियां: शरीर पर गर्मी से पैदा हुई फुंसियों पर चंदन और गुलाबजल में पिसे हुए धनिये और खस का लेप करना चाहिए। केवल चंदन भी लाभ करता है।

6. गर्मी :
चावल के पानी में सफेद चंदन घिसकर चीनी के साथ देने से गर्मी में राहत मिलती है।
गर्मी के दिनों में शरीर की गर्मी दूर करने के लिए 20 ग्राम चंदन को घिसकर मिश्री मिलाकर शर्बत बनाकर पीने से मानसिक शान्ति मिलती है और शरीर को भी शांति मिलती है।

7. हिचकी :
स्त्री के दूध में चंदन को घिसकर नाक में डालने से हिचकी आना बंद हो जाती है।
चंदन और नीमगिलोय का चूर्ण सूंघने से हिचकी में लाभ होता है।
स्त्री के दूध में लाल चंदन को घिसकर सूंघने से हिचकी नहीं आती है।

8. प्रमेह और प्रदर: लगभग 10 ग्राम वंशलोचन और 10 ग्राम इलायची के दानों को बारीक पीसकर कपडे़ से छान लेते हैं। इसके बाद उसे चंदन के तेल में मिलाकर सुपारी के बराबर गोलियां बनाएं। सुबह-शाम 5 ग्राम चीनी को 40 मिलीलीटर ठण्डे पानी में मिलाकर एक-एक गोली के साथ सेवन करना चाहिए। इसका पथ्य गेहूं की रोटी, अरहर की दाल, घी और चीनी है।
9. तेज बुखार में नींद न आने और सिर दर्द करने पर: कपूर, केसर और चंदन को घिसकर सिर पर लगाने से तेज बुखार की वजह से नींद न आना और सिर में दर्द में लाभ मिलता है।
10. शरीर के किसी जगह पर सूजन होने से जलन: जलन के स्थान पर चंदन को घिसकर कुछ दिनों तक लेप करते रहने से जलन दूर होकर सूजन ठीक हो जाती है।
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रविवार, 15 मई 2016

नकसीर

🐚♦नकसीर♦🐚
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🔹तत्काल नकसीर बन्द करने के लिए तीन ग्राम सुहागे को थोड़े पानी में घोलकर दोनों नथुनों पर लेप कर दें। नकसीर तत्काल बन्द हो जाएगी
🔹सिर पर ठंडे पानी की धार डालने से नाक से रक्त गिरना शीध्र बंद हो जाता है। यदि नकसीर बंद न हो तो उपरोक्त सुहागे के घोल के लेप से अवश्य बंद हो जाएगी।
🔹पुरानी नकसीर की बिमारी में संजीवनी  — बीस ग्राम मुल्तानी मिट्टी को जरा सा कूटकर रात्रि के समय मिट्टी के वर्तन में पाव किलो पानी में डालकर भिगो दें। प्रातः पानी को निथार कर छान लें। इस साफ पानी को पिलाने से (बच्चों को आधी मात्रा) दो-तीन दिन पिलाने से वर्षों पुराना रोग सदा के लिए समूल नाश गो जाता है। बच्चों को इस पानी में बताशा या मिश्री मिलाकर पिलाएँ।
विशेष  — नदी के समान बहती हुई नकसीर इससे तत्काल बंद हो जाती है। जिनको दिन में कई बार नकसीर फूटती हो उनके लिए भी संजीवनी के समान उत्तम है। मुल्तानी मिट्टी का पानी पिलाने के साथ नीचे बैठी हुई मुल्तानी मिट्टी का रोगी के मस्तिष्क तथा नाक पर पाँच मिनट के करने से और भी अधिक लाभ होगा।