सोमवार, 6 फ़रवरी 2012


Anemia is a condition usually associated with lack of hemoglobin (red blood cells) in the body. It normally occurs due to deficiency of nutrients like iron and vitamins.
The red blood cells in the body are responsible to carry oxygen to various cells and organs. The oxygen is important for the life and existence of these cells.
It is hence important to have optimum levels of hemoglobin levels maintained in the body.
On this page we will discuss the symptoms causes and natural treatment options for Anemia using alternative treatment methods like Ayurveda and herbs.
Other names: Iron deficiency, low hemoglobin
Symptoms Anemia by itself does not has any alarming symptom. The symptoms may vary from case to depending upon the underlying condition.
If you or any of your friend is experiencing any of the following symptoms, chances are that they are suffering from Anemia.
  • Feeling of weakness or fatigue - even after taking adequate rest and diet.
  • Unexplained Weight loss
  • Dark circles under eyes
  • Irregular shape of the nails
  • Pale skin


  • Physical examination - skin color, nail shape and texture.
  • Usually a blood test is required to determine the level of hemoglobin.

Root cause:

  • The root cause for Anemia is improper digestion OR lack of intake of healthy foods.
  • People who do not consume foods rich in Vitamins like Iron, Folic Acid and Vitamin b12 are more prone to Anemia.

Treatment approach

In severe cases of Anemia blood transfusion may be required. But in most cases Anemia can be treated by simple modifications in the diet.

Treatment with Natural Ayurvedic herbs & home remedies

Take the following foods regularly in your diet.
- Green leafy vegetables like Spinach, Fenugreek and Spinach for Iron
- Beet root juice mixed with Carrot Juice for essential Vitamins and Iron.
- Spinach is considered to be the best source of Iron.
- Groundnuts and sprouts for folic acid and protein.
- Milk and dairy product for Vitamin B12.
- Aamla and citrus fruits like Oranges for Vitamin C.
Regular intake of healthy foods along with moderate exercise to improve digestion can normalize the levels of hemoglobin.

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

थकान उतारने के आसान तरीके

थकान उतारने के आसान तरीके

अधिक परिश्रम करने से शरीर में थकान आ जाती है, शरीर सुस्त हो जाता है। फिर कुछ काम करने का मन नहीं करता, सिर्फ आराम की जरूरत महसूस होती है।

थकान उतारने के लिए आप कुछ इस तरह प्रयास करें-

अपनी दो अँगुलियों के पोरों से चेहरे की हल्की मालिश करें। इससे ब्लड सर्कूलेशन बढ़ेगा, जिससे आप महसूस करेंगे कि आपकी थकान रफूचक्कर हो गई है।

* नाक के दोनों ओर हल्की मालिश करते हुए धीरे-धीरे दोनों आँखों के बीच वाले भाग से लेकर आँखों के नीचे भी हल्की मालिश करें। फिर इसी तरह से भौहों तक पहुँचें।

* भौहों पर हल्का दबाव डालते हुए अंदर से बाहर की ओर मालिश करें।

* अब आँखों के बाहरी किनारों पर मालिश करते हुए ललाट तक पहुँचें।

* इसके बाद आँखों के एकदम नीचे की ओर आएँ। गालों के बीच हल्की मालिश करते हुए फिर ऊपर से ही मसूड़ों की भी मालिश करें। इसके बाद जबड़ों को अंगुलियों की पकड़ में लें और जबड़ों के किनारों पर हल्का दबाव डालें।

* कई बार सुगंधित तेल के प्रयोग से भी शरीर की थकावट को भगाया जा सकता है। सुगंधित तेल से प्रभावित अंग की हल्की मालिश करने से ताजगी महसूस होती है, इसके लिए सुगंधित तेल की कुछ बूँदें वनस्पति तेल में मिलाकर मालिश करनी चाहिए। 

घरेलू उपचार---Cough and cold

Cough and cold

If a child has a cough and cold:

1.Crush 10-15 'tulsi' leaves. Give one teasthingy of this juice mixed with honey or jaggery three times a day to babies for 5 days.

2.Heat four teasthingys of coconut oil. Crush one teasthingy of camphor (Kapoor or Karpura). Dissolve this in the oil. Keep it stored in airtight bottles. This can be rubbed on the chest and throat of the child to relieve congestion. (This can also be used for any muscular pain).

If an adult has cough and cold:

1.Boil a handful of fresh eucalyptus leaves in two glasses of water, till only one glass is left. Strain this water and add sugar. Drink this three times a day for 5 days.

2.Another effective medicine for cough and cold is Leucas aspera (Hindi: Guma, Tamil: Thumbai). This is a wild plant with white bell- shaped flowers. Boil one handful of fresh leaves in water with a pinch of turmeric powder (haldi). Inhale the steam. This helps to relieve congestion.

3.Boil a handful of leaves in a glass of water until the water gets reduced to half. Add one teasthingy of honey. Give three times a day for five days.





1.Soak a piece of turmeric in castor oil and burn it. Inhale the fumes. Burn a few pepper corns (Hindi: Kali mirch, Tamil: Milagu) and inhale the fumes.

2.Mix together half a cup of bitter gourd (Hindi: Karela, Tamil: Paharkai) juice, half a lime and one tablesthingy of honey. Drink three times a day for 5 days.

Sore Throat

1.Crush fresh ginger to get 1 teasthingyful of the juice and mix this with equal amount of honey. Take this every three hours. This is very soothing to the throat.

2.Boil some water. Add the juice of one lime and sugar or salt. Take this hot once every 3-4 hours.

3.Boil a glass of milk with a pinch of turmeric and pepper powder (black pepper) and drink it hot at bedtime.

बच्चों का तुतलाना व हकलाना

बच्चों का तुतलाना व हकलाना

बच्चे यदि एक ताज़ा हरा आँवला रोजाना कुछ दिन चबाएँ तो तुतलाना और हकलाना मिटता है। जीभ पतली होती है, और आवाज़ साफ आने लगती है।

या बादाम की गिरी सात, काली मिर्च सात; कुछ बुँदें पानी में घिसकर दोनो की चटनी सी बना लें और इसमें ज़रा-सी मिश्री पिसी हुई मिलाकर चाटें। प्रातः खाली पेट कुछ दिन लें।

या दो काली मिर्च मुँह में रखकर चबायें-चूसें। यह प्रयोग दिन में दो बार लम्बे समय तक करें।

हर बीमारी की जड़ है तनाव

हर बीमारी की जड़ है तनाव

तनाव के बुरे प्रभावों को हम सभी जान चुके हैं, लेकिन अमेरिकी अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार मसूड़ों की सड़न से लेकर खांसी और बुखार जैसी बीमारियों के लिए भी यह जिम्मेदार है।

'एसोसिएशन आफ साइकोलाजिकल साइंस' की मासिक पत्रिका 'आबजर्वर' द्वारा प्रकाशित इस अध्ययन में मनोविज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, स्नायु विज्ञान और अनुवांशिकी के क्षेत्र में किए गए अध्ययन के अनुसार तनाव लगभग सभी बीमारियों की जड़ है।

अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार तनाव विपरीत परिस्थितियों के अनुसार ढलने की इंसान की क्षमता को प्रभावित करता है। तनाव की परिस्थिति में 'एड्रनलीन' और 'कार्टीजोल' जैसे हारमोन निकलते हैं जिनके चलते धड़कन तेज होने और सांस की गति बढ़ने के अलावा रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। 

अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि तनाव के चलते मस्तिष्क में होने वाले बदलाव पेट व आंतों की गड़बड़ियों सहित मसूड़ों में खराबी, मधुमेह यहां तक की कैंसर का भी कारण बन सकते हैं। साथ ही इसके चलते कैंसर जैसी बीमारी और एचआईवी जैसे वायरसों से लड़ने की क्षमता भी प्रभावित होती ह

Combination of Juices for various remedies...

Combination of Juices for various remedies...

Carrot + Ginger + Apple  - Boost and cleanse our system. 

Apple + Cucumber + Celery -  Prevent cancer, reduce cholesterol, and improve stomach upset and headache. 

Tomato + Carrot + Apple - Improve skin complexion and bad breath. 

Bitter gourd + Apple + Milk -  Avoid bad breath and reduce internal body heat. 

Orange + Ginger + Cucumber - Improve Skin texture and moisture and reduce body heat. 

Pineapple + Apple + Watermelon - To dispel excess salts, nourishes the bladder and kidney. 

Apple + Cucumber + Kiwi - To improve skin complexion. 

Pear & Banana -  regulates sugar content. 

Carrot + Apple + Pear + Mango - Clear body heat, counteracts toxicity, decreased blood pressure and fight oxidization. 

Honeydew + Grape + Watermelon + Milk - Rich in vitamin C + Vitamin B2 that increase cell activity and strengthen body immunity. 

Papaya + Pineapple + Milk - Rich in vitamin C, E, Iron. Improve skin complexion and metabolism. 

Banana + Pineapple + Milk - Rich in vitamin with nutritious and prevent constipation.

झुर्रियाँ कुछ उपाय

झुर्रियाँ कुछ उपाय

आधा चम्मच दुध की ठंडी मलाई में नींबु के रस की चार पाँच बूंदें मिलाकर झुर्रियाँ पर सोते समय अच्छी तरह मलें। पहले गुनगुने पानी से चेहरा अच्छी मलें। फिर गुनगुने पानी से चेहरा अच्छी तरह धोएं और बाद में खुरदरे तौलिए से रगड-पौंछकर सुखा लें। इसके बाद मलाई दोनों हथेलियों से तब तक मलते रहें जब तक कि मलाई घुलकर त्वचा में रम न जाए। बीस मिनट या आधा घण्टे बाद स्नान कर लें या पानी से धो डालें परन्तु साबुन का प्रयोग न करें। नित्य १५ - २० दिन तक नियमित प्रयोग से झुर्रियाँ दुर होती हैं तथा चेहरे के काले दाग मिट जाते हैं। 

या पके हुए पपीते का एक टुकडा काटकर चेहरे पर घिसें या गूदा मसलकर चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद स्नान कर लें। कुछ दिन लगातार ऐसा करने से चेहरे की झुर्रियाँ, धब्बे, दूर होते हैं, मैल नष्ट होता है। व मुहाँसे मिटकर चेहरे की रंगत निखरती है।

या 'ई' और 'ओ' बोलते हुए एक बार चेहरे को फैलाएं और फिर सिकोडें। दुसरे शब्दों मे 'ई' के उच्चारण के साथ ऐसी मुद्रा बनाएँ मानों कि आप मुस्कुराने जा रहे है। कुछ क्षण इसी मुद्रा में रहने के बाद होठों को आगे की तरफ बढाते हुए इस प्रकार मुद्रा बनाएँ मानों कि आप सीटी बजाना चाह रहे हैं। इससे गालों का अच्छा व्यायाम होता है जिससे गालों की पुष्टि होती है और झुर्रियाँ से बचाव। यह क्रिया एक बार में १५-२० बार करें और दिन में तीन बार करें। 

या मुँह से फूँक मारते हुए गाल फुलाएं व पेट पिचकाएँ फिर नाक से सांस खींचें। इस प्रकार १५-२० बार करें और दिन में तीन बार करें। गाल पुष्ट होंगे। 

या चेहरे में आँखों के छोर की रेखाएँ (झुर्रियाँ) मिटाने के लिए खीरे को गोलाई में टुकडे काटकर आँखों के नीचे-ऊपर लगा दें। माथे पर कुछ लम्बे टुंकडे लगाकर तनाव-रहित होकर कुछ देर लेटना चाहिए। इस क्रिया को प्रतिदिन एक बार करने से लगभग दो सप्ताह में ये लकीरें मिट जाती है।

या त्वचा की झुर्रियाँ मिटाने के लिए आधा गिलास गाजर का रस नित्य शाम चार बजे दो तीन सप्ताह लें।

या चेहरे पर झुर्रियों हों ही न ऐसा करने के लिए अंकुरित चने व मूंग को सुबह व शाम खाएँ। इनमें विद्यमान विटामिन 'इ' झुर्रियाँ मिटाने और युवा बनाये रखने में विशेष सहायक होता है।



Prepare a mixture by adding two tablespoons of cosmetic vinegar and six tablespoons of hot water. Apply it all over the scalp, parting the hair with a comb. Preferably it should be used at bedtime. Tie a scarf over the hair to avoid staining the pillow. Next morning wash the hair with shampoo. This should be done twice a week for three months. This is very useful home remedy for dandruff.

Prepare a mixture of olive oil with the almond oil. Leave it on about 5 min.s after it starts to burn. Wash well to clear dandruff.

राइनाइटिस ऍलर्जी का आयुर्वेदिक उपचार

राइनाइटिस ऍलर्जी का आयुर्वेदिक उपचार

क्या आपकी नाक हमेशा अगर एक बार बहना शुरू हो जाए, तो थमने का नाम नहीं लेती? छींक पर छींक आती रहती हैं? आँखों से आँसू बहने लगते है और गले में खराश पैदा हो जाती है? अगर इन सवालों का जवाब “हाँ” है, तो आप राइनाइटिस ऍलर्जी के शिकार हैं। दुर्भाग्यवश ऍलोपेथी में इसकी रोकथाम के उपाय तो हैं, लेकिन जड़ से सही करने का कोई इलाज नहीं है।

हालाँकि इस व्याधि में आयुर्वेदिक उपचार बहुत कारगर है। आयुर्वेद का प्रयोग कर इस बीमारी से पूरी तरह निजात पा सकते हैं। इसके लिए कुछ ख़ास बातें ध्यान में रखनी होंगी –

1: “अणु तैल” की दो-दो बूंदों से दिन में दो बार नस्य-क्रिया करें।
2: “ब्राह्म रसायन” का सेवन करें।
3: रात को देर तक न जागें और सुबह जल्दी उठें।

घरेलू उपचार--तिल्ली एवं जिगर और तिल्ली, दोनों के बढ़ने पर

तिल्ली एवं जिगर और तिल्ली, दोनों के बढ़ने पर

पुराना गुड़ डेढ़ ग्राम और बड़ी (पिली) हरड़ के छिल्के का चुर्ण बराबर वजन मिलाकर एक गोली दिन में दो बार प्रातः सायं हल्के गर्म पानी के साथ एक महीने तक लें। इससे जिगर और तिल्ली, यदि दोनों ही बढ़े हुए हों, तो भी ठीक हो जाते हैं।

इसके तीन दिन के प्रयोग से अम्लपित्त का भी नाश होता है।

घरेलू उपचार---बालों का समय से पहले सफेद होना

बालों का समय से पहले सफेद होना 

एक चम्मच भर आंवला चूर्ण दो घूंट पानी से सोते समय अंतिम वस्तु के रूप में लें। असमय बाल सफेद होने और चेहरे की कान्ति नष्ट होने पर जादू का सा असर करता है। (साथ ही स्वर को मधुर और शुद्ध बनाता है तथा गले की घर-घराहट भी इससे ठीक हो जाती है।

या आंवला चूर्ण का लेप - सूखे आंवलों के चूर्ण को पानी के साथ लेई बनाकर इसका खोपड़ी पर लेप करने तथा पाँच दस मिनट बाद केशों को जल से धो लेने से बाल सफेद होने और गिरने बन्द हो जाते है।

या आंवला जल से सिर धोना सर्वोत्तम - विधि इस प्रकार है - २५ ग्राम सूखे आंवलों के यवकूट (मोटा-मोटा कूटकर) किए हुए टुकड़ों को २५० ग्राम पानी में रात को भिगो दें। प्रातः फूले हुए आंवलों को कड़े हाथ से मसलकर सारा जल पतले स्वच्छ कपड़े से छान लें। अब इस निथरे हुए जल को केशों की जड़ों में हल्के-हल्के अच्छी तरह मलिए और दस बीस मिनट बाद केशों को सादे पानी से धो डालिए। रूखे बालों को सप्ताह में एक बार और चिकने बालों को सप्ताह में दो बार धोना चाहिए। आवश्यकता हो तो कुछ दिन रोजाना भी धोया जा सकता है। केश धोने के एक घंटे पहले या जिस दिन केश धोने हों, उसके एक दिन पहले रात में आंवलों के तेल की मालिश केशों में करें।

घरेलू उपचार--मुंहासे

संतरे के छिल्कों को छाया में सुखाकर बनाया गया बारिक चूर्ण और बराबर मात्रा में बेसन (अथवा बारीक पिसी हुई मुल्तानी मिट्टी दुगुनी) मिलाकर मिश्रण बना लें। इस मिश्रण को पन्द्रह मिनट पानी में भिगोने के बाद गाढ़ा घोल बना लें और इसका मुंहासिं पर लेप करं। दस मिनट लगा रहने के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लिया जाए तो इस प्रकार ४-६ सप्ताह के प्रयोग से मुंहासे नष्ट हो जाते हैं।

उपरोक्त संतरे के छिल्कों का महीन चुर्ण को गुलाब जल में मिलाकर बनाये गये घोल का लेप करने से चेहरे के मुंहासे नष्ट होते हैं तथा चेचक के दाग भी दूर होते हैं।

शीघ्र लाभ प्राप्त करने हेतु उपरोक्त प्रयोग के साथ-साथ त्रिफला-चूर्ण दो ग्राम की मात्रा से गर्म पानी से रात्री सोते समय लेते रहें।

मुनक्का १० नग पानी से साफ कर लें और रात को ६० ग्राम पानी में भिगो दें। प्रातः बीज निकालकर खा लें और बचे पानी में थोड़ी मिश्री या शक्कर मिलाकर या वैसे ही पी लें। एक मास तक सेवन करने से मुंहासे निकलने बन्द हो जाएंगे तथा खून साफ होगा।

घरेलू उपचार--पेचिश (नई या पुरानी)

पेचिश (नई या पुरानी)

स्वच्छ सौंफ ३०० ग्राम और मिश्री ३०० ग्राम लें। सौंफ के दो बराबर हिस्से कर लें। एक हिस्सा तवे पर भून लें। भुनी हुई और बची हुई सौंफ लेकर बारीक पीस लें और उतनी  ही मिश्री (पिसी हुई) मिला लें। इस चूर्ण को छः ग्राम (दो चम्मच) की मात्रा से दिन में चार बार खायें। ऊपर से दो घूँट पानी पी सकते हैं। आंवयुक्त पेचिश - नयी या पुरानी (मरोड़ देकर थोडा-थोडा मल तथा आंव आना) के लिए रामबाण है। सौंफ खाने से बस्ती-शूल या पीड़ा सहित आंव आना मिटता है।

या दही, भात, मिश्री के साथ खाने से आंव-मरोड़ी के दस्तों में आराम आता है।

या मैथी (शुष्क दाना) का साग बनाकर रोजाना खावें अथवा मैथी दाना का चूर्ण तीन ग्राम दही में मिलाकर सेवन करें। आंव की बिमारी में लाभ के अतिरिक्त इससे पेशाब का अधिक आना भी बन्द होता है। प्रतिदिन मैथी का साग खाने से आंव की बिमारी अच्छी होती है। और पेशाब का अधिक आना बन्द होता है।



1.Take 1 Cup beetroot juice, 1 cup of apple juice, mixed with either sugar or honey once a day to prevent anemia.
2.Take a ripe banana with 1 tbsp of honey 2 times a day for treatment of weakness.
3.A mixture of apple and tomato juice also helps to fight against the weakness.
4.Eating a lot of salad also helps to prevent anemia.
5.Honey is very good for an anemic person because it helps increase the hemoglobin in the blood. It is rich in iron, copper and manganese. rtant for the absorption of iron. It is recommended to take two any citrus fruits daily.
6.Beets are very important in the cure of anemia. Its juice contains potassium, phosphorus, calcium, sulphur, iodine, iron, copper, carbohydrates, protein, fat, and vitamins B1, B2, B6, C and P.
7.Drink peppermint tea to increase appetite.
8.Oranges stimulate the flow of digestive juices, thereby improving digestion and increasing appetite.
9.The juice of sour grapes is another effective home remedy for anorexia. The juice of these grapes should be used in kneading the flour before preparing chapattis. Chapattis made in this manner should be eaten continuously for two to three weeks.
10.About one teaspoon of the juice of lime should be mixed with an equal quantity of the juice of ginger. One gram of rock salt should be added to this mixture. It should then be placed in sunlight for three days. A teaspoon taken after each meal will tone up the digestive system and improve the appetite.
11.Apples help in digestion by stimulating the flow of pepsin, a protein-digesting enzyme, in the stomach.
12.Three or four cloves of raw garlic should be boiled in a cup of water. This soup can be reinforced with the juice of half a lemon and taken twice daily.
13.About five grams of ginger should be ground and licked with a little salt once a day for the treatment of weakness.
14.The application of an ice bag over the stomach for half an hour before meals, and a cool hipbath once or twice daily, will help in curing anorexia.
15.An early morning sunbath, taken one day, should be alternated with an early morning cool air bath the next day.
16.Supplements of vitamins and minerals should be taken to increase the appetite.
17.Drink lots of water by adding some water or salt to it. This is an effective home remedy for weakness.
18.Prepare a mixture by ading 1 Tbsp poppy seeds, 1 tsp edible gum, 1 tsp cardamom powder, 1/2 tsp nutmeg (jaiphal) powder, and2 tbs sugar, and grind to a powder. Take this powder every 2 hours.
19.Prepare a mixture by adding 1/2 tsp lemon juice, 1/2 tsp ginger juice, and 1/4 tsp pepper powder and drink it. This is an effective home remedy for weakness.
Small, frequent feeds of energy-rich local foods familiar to the child should be given. A little vegetable oil can be added to foods such as millet or rice to increase the energy content.
20.Take yogurt, buttermilk, mint, apple, pomegranate, papaya, banana, carrot, potato, etc.

घरेलू उपचार--Bleeding Gums

Bleeding Gums
Treatment for Bleeding gums :
Gingivitis (pronounced "jin-ja-VI-tus" ), is the inflammation, swelling, and bleeding of gum tissues.
Have you ever wondered when your gums bleed when you brush your teeth? It is a first sign of gingivitis.
The primary cause of gingivitis is the bacteria that coats your teeth, and if oral hygiene is poor, it forms a sticky white substance called plaque.
The bacteria here proliferates faster and produces toxins that irritates your gums, keeping them swollen and red.
When they are left untreated, they will destroy the tissues connecting the gums to the tooth, and eventually the tooth to the bones, causing a deep pocket and eventually attacks the bony structure. It has now progressed into what we call periodontitis which is an irreversible form of gum disease.

tips & home remedies for bleeding gums

With a pinch of salt soaked in a glass of lukewarm water, you now create a homemade saline solution. Use this to rinse in the morning and in the evening. This will help increase circulation in your gums and reduce the swelling.

No matter how well and how often you brush your teeth, you can't reach the areas between your teeth and below the gums. Make the habit of flossing. Floss comes in very handy. Keep one in your bag or at your office. After meal, floss it!

घरेलू उपचार--कब्ज


कब्ज होने पर रात्रि सोते समय दस बारह मुनक्के (पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर बीज निकाल कर) दूध में उबाल कर खाएँ और ऊपर से वही दूध पी लें। प्रातः खुलकर शौच लगेगा। भयंकर कब्ज में तीन दिन लगातर लें और बाद में आवश्यकतानुसार कभी-कभी लें। 

या  त्रिफला चुर्ण चार ग्राम (एक चम्मच भर) २०० ग्राम हल्के गर्म दूध अथवा गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होता है।

या दस ग्राम (दो चम्मच) ईसबगोल की भूसी छः घंटे पानी में भिगोकर इतनी ही मिश्री मिलाकर रात सोते समय जल के साथ लेने से दस्त साफ आता है। इसे केवल पानी के साथ वैसे ही, बिना भिगोये ही, रात्रि सोते समय लिया जा सकता है।

या ईसबगोल की भूसी दस से पन्द्रह ग्राम (दो से तीन चम्मच) की मात्रा में २०० ग्राम गर्म दूध में भिगो दें। यह फूलकर गाढ़ी हो जाएगी। इसे चीनी मिलाकर खाएँ और ऊपर से थोड़ा और गर्म दूध पी लें। शाम को इसे लें तो प्रातः मल बंधा हुआ साफ आ जाएगा।

या ईसबगोल की भूसी १० - १५ ग्राम की मात्रा में थोड़े गर्म दूध के साथ मिलाकर नित्य रात को सोते समय खाने से प्रातः को पेट साफ हो जाता है। दूध में आधा पानी मिलाकर एक या दो उबाल आने तक औटाना चाहिये।

या आरंड़ का तेल अवस्थानुसार एक से पांच चम्मच की मात्रा से एक कप गर्म पानी या दूध में मिलाकर रात सोते समय पीने से कब्ज दूर होकर साफ आता है।

या आरंड़ का तेल बहुत ही अच्छा हानि रहित जुलाब है। इसे छोटे बच्चे को भी दिया जा सकता है और दूध के विकार से पेट दर्द तथा उल्टी होने की अवस्था में भी इसका प्रयोग बहुत हितकारी होता है।

या पुराना से पुराना अथवा बिगड़ा हुआ कब्ज - दो संतरों का रस खाली पेट प्रातः आठ दस दिन पीने से पुराना से पुराना अथवा बिगड़ा हुआ कैसा भी कब्ज हो, ठीक हो जाता है।
कब्ज रोग एवं उपचारः
कब्ज शरीर के समस्त रोगों की जड़ है। परन्तु प्रश्न यह उठता है कि कब्ज क्या हैं ? कब्ज का संबंध पाचन क्रिया से है। जब मानव शरीर की पाचन क्रिया बिगड़ जाती है, अर्थात् जो भोजन हम करते हैं, वह सही ढंग से न पचना, आंतों में फंसा रह जाना, जिसकी वजह से गैस बनना, पेट में दर्द रहना, मिचली आना, शौच जाने में समय लगना एवं नित्य पेट साफ न होना, दिन में तीन चार बार शौच जाना, पेट गुडगुडा़ना, बदबूदार गैस निकलना और खट्टी डकारें आना आदि अनेकों परेशानियां पैदा हो जाती हैं, जिससे नये-नये रोगों की उत्पत्ति होती है। मानव शरीर को जरूरी है कि वह इन परिस्थितियों से बचे, तभी पूर्ण स्वस्थ्य रह सकते हैं। नीचे कब्ज रोग दूर करने हेतु कुछ नुस्खे दिए जा रहे हैं, जो प्रामाणिक एवं अनुभूत हैं- 
1-  त्रिफला (हर्र, बहेड़ा, आंवला) तीनों समान मात्रा में कूट पीसकर रख लें। 3 ग्राम से 5 ग्राम तक की मात्रा रात्रि में सोते समय गुनगुने पानी के साथ लें। लगातार कुछ दिनों तक लेने से लाभ अवश्य देगा। साथ ही रात्रि में तांबे के पात्र में पानी रख लें एवं सुबह उसे पी लें। इसके दस मिनट बाद शौच जायें, आराम से पेट साफ होगा।
2-  पंसारी के यहां से छोटी हरड़ ले लें। प्रतिदिन कम से कम दो या तीन हरड़ अवश्य चूसें, चूस कर ही यह पेट में जाय। लगातार कुछ दिन इसका प्रयोग करने पर हर तरह की कब्ज दूर  हो जाती है।
3-  त्रिफला 25ग्राम, सौंफ25ग्राम, सोंठ 5ग्राम, बादाम 50ग्राम, मिश्री 20ग्राम लें और गुलाब के  फूल 50 ग्राम भी लें। सभी को कूट-पीसकर एक शीशी में रख लें। रात्रि में सोते समय 5 से 7ग्राम तक दवा दूध या शहद के साथ लें। यह नुस्खा अपने आपमें चमत्कारी है। इस नुस्खे से न आंतों की खुश्की का डर रहता है और न ही कमजोरी का।
नोटः-जिन्हें कब्ज की शिकायत हो, वे ध्यान दें कि वे गरिष्ठ चीजें, तली चीजें, उरद आदि का सेवन कम मात्रा में करें। गेहूं का आटा भी ज्यादा महीन न पिसायें और चोकर न निकालें। आठवां हिस्सा गेहूं में चना मिला आटे की रोटी का सेवन करें। थोड़ा मेहनत या योग आदि जरूर करें। पानी ज्यादा से ज्यादा पियें, पूर्ण लाभ होगा। 
        यह शरीर आयुर्वेद के मतानुसार त्रिधातु (बात, पित्त, कफ) के सन्तुलन से सुचारू रूप से चलता है। जब तक यह त्रिधातु सामान्य रूप से इस शरीर में गतिमान रहती है, तब तक यह शरीर पूर्णतः निरोग एवं स्वस्थ रहता है, जब भी इनमें असमानता आती है तो उसी के अनुसार शरीर में रोगों का प्रभाव दिखने लगता है। हम इस लेख में इस शरीर के अन्दर विद्यमान त्रिधातुओं का पहला अंग वात दोष से संबंधित जानकारी दे रहे हैैं। यह दोष विश्व के 35 प्रतिशत लोगों को प्रभावित रखता है।

रविवार, 22 जनवरी 2012


massage table
Shirodhara Stand
shirodhara stand
Steam Dom
steam dom
Shirodhara Pots
shirodhara pot
shirodhara pot

शनिवार, 21 जनवरी 2012

Anal Abscess

Anal Abscess

An anal abscess (also known as an anal/rectal abscess, peri-rectal/peri-anal abscess, or ano-rectal abscess) is an abscess (a large pocket of infection) adjacent to the anus.


The condition invariably becomes extremely painful, and usually worsens over the course of just a few days. The pain may be limited and sporadic at first, but invariably worsens to a constant pain which can become very severe when body position is changed (e.g., when standing up, rolling over, and so forth). Depending upon the exact location of the abscess, there can also be excruciating pain during bowel movements, though this is not always the case. This condition may occur in isolation, but is frequently indicative of another underlying disorder, such as Crohn's disease.


Abscesses are caused by a high density infection of (usually) common bacteria which collect in one place or another for any variety of reasons. All abscesses can progress to serious generalized infections requiring lengthy hospitalizations if not treated.

Historically, many rectal abscesses are caused by bacteria common in the digestive system, such as E. coli.


Anal abscesses, unfortunately, cannot be treated by a simple course of antibiotics or other medications.

Generally speaking, a fairly small but deep incision is performed close to the root of the abscess, and Kshar-varti is applied to the wound which curates the internal wall of abscess and heals the wound in the course of time. The incision is not closed (stitched), as the damaged tissues must heal from the inside toward the skin over a period of time.

The patient is instructed to perform several 'sitz baths' per day, whereby a small basin (which usually fits over a toilet) is filled with warm water (and possibly, salts) and the affected area is soaked for a period of time.

Perianal Hematoma

Perianal Hematoma

A Perianal hematoma is a type of hematoma located in, or on the border of the anus. It can be misdiagnosed as a hemorrhoid, but is sometimes referred to as an external hemorrhoid.


Perianal hematoma is caused by the rupture of a small vein that drains blood from the anus. This rupture may be caused by heavy lifting, coughing, straining, or bicycle riding. Once the rupture has formed, blood quickly pools within a few hours and, if left untreated, forms a clot.


A burst Perianal Blood Vessel causes an Perianal Hematoma, or "external haemorrhoid".

The symptoms of a perianal hematoma can present over a short period of time. Pain, varying from mild to severe, will occur as the skin surrounding the rupture expands due to pressure. This pain will usually last even after the blood has clotted, and may continue for two to four days.



बवासीर दो प्रकार की होती है - खूनी बवासीर और बादी वाली बवासीर,खूनी बवासीर में मस्से खूनी सुर्ख होते है,और उनसे खून गिरता है, जबकि बादी वाली बवासीर में मस्से काले रंग के होते है,और मस्सों में खाज पीडा और सूजन होती है, अतिसार संग्रहणी और बवासीर यह एक दूसरे को पैदा करने वाले होते है। बवासीर के रोगी को बादी और तले हुये पदार्थ नही खाने चाहिये, जिनसे पेट में कब्ज की संभावना हो,हरी सब्जियों का ज्यादा प्रयोग करना चाहिये,बवासीर से बचने का सबसे सरल उपाय यह है कि शौच करने उपरान्त मलद्वार अच्छी तरह से साफ़ करें,इससे कभी बवासीर नही होता है। इसके लिये आवश्यक है कि नाखून कतई बडा नही हो,अन्यथा भीतरी मुलायम खाल के जख्मी होने का खतरा होता है, प्रारंभ में यह उपाय अटपटा लगता है,पर शीघ्र ही इसके अभ्यस्त हो जाने पर तरोताजा महसूस भी होने लगता है,इसके घरेलू उपचार इस प्रकार से है ।

  • जीरे को जरूरत के अनुसार भून कर उसमे मिश्री मिलाकर मुंह में डालकर चूंसने से तथा बिना भुने जीरे को पीस कर मस्सों पर लगाने से बवासीर की बीमारी में फ़ायदा होता है |
  • पके केले को बीच से चीरकर दो टुकडे कर लें और उसपर चार ग्राम कत्था पीसकर छिडक दें,इसके बाद उस केले को खुले आसमान के नीचे शाम को रख दें, सुबह को उस केले को प्रातःकाल की क्रिया करके खालें, एक हफ़्ते तक इस प्रयोग को करने के बाद भयंकर से भयंकर बवासीर समाप्त हो जाती है ।
  • छोटी पिप्पली को पीस कर चूर्ण बना ले, और दो ग्राम चूर्ण एक चम्मच शहद के साथ लेने से आराम मिलता है
  • एक चम्मच आंवले का चूर्ण सुबह शाम शहद के साथ लेने पर बवासीर में लाभ मिलता है, इससे पेट के अन्य रोग भी समाप्त होते है |
  • खूनी बवासीर में नींबू को बीच से चीर कर उस पर चार ग्राम कत्था पीसकर बुरक दें, और उसे रात में छत पर रख दें,सुबह दोनो टुकडों को चूस लें, यह प्रयोग पांच दिन करें खूनी बवासीर की यह उत्तम दवा है |

  • खूनी बवासीर में गेंदे के हरे पत्ते नौ ग्राम काली मिर्च के पांच दाने और मिश्री दस ग्राम लेकर साठ ग्राम पानी में पीस कर मिला लें, दिन में एक बार चार दिन तक इस पानी को पिएं, गरम चीजों को न खायें, खूनी बवासीर खत्म हो जायेगा ।
  • पचास ग्राम बडी इलायची तवे पर रख कर जला लें,ठंडी होने पर पीस लें, रोज सुबह तीन ग्राम चूर्ण पंद्रह दिनो तक ताजे पानी से लें, बवासीर में लाभ होता है |
  • दूध का ताजा मक्खन और काले तिल दोनो एक एक ग्राम को मिलाकर खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है |
  • नागकेशर मिश्री और ताजा मक्खन इन तीनो को रोजाना सम भाग खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है |
  • नीम के ग्यारह बीज और छः ग्राम शक्कर रोजाना सुबह को फ़ांकने से बवासीर में आराम मिलता है |
  • कमल का हरा पत्ता पीसकर उसमे मिश्री मिलाकर खायें,बवासीर का खून आना बन्द हो जाता है |
  • सुबह शाम को बकरी का दूध पीने से बवासीर से खून आना बन्द हो जाता है |
  • प्रतिदिन दही और छाछ का प्रयोग बवासीर का नाशक है |
  • गुड के साथ हरड खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है |
  • बवासीर में छाछ अम्रुत के समान है, लेकिन बिना सेंधा नमक मिलाये इसे नही खाना चाहिये |
  • मूली का नियमित सेवन बवासीर को ठीक कर देता है |
बवासीर क्या है ...?

* बवासीर आजकल एक आम बीमारी के रूप में प्रचलित है। इस रोग मे गुदे की खून की नसें (शिराएं) फ़ूलकर शोथयुक्त हो जाती हैं,जिससे दर्द,जलन,और कभी कभी रक्तस्राव भी होता है।बवासीर का प्रधान कारण कब्ज का होना है।जिगर मे रक्त संकुलता भी इस रोग कारण होती है। मोटापा, व्यायाम नहीं करना और भोजन में रेशे(फ़ाईबर) की कमी से भी इस रोग की उत्पत्ति होती है।

बवासीर दो प्रकार की होती है:--

खूनी बवासीर :-

* अंदर की बवासीर से खून निकलता है इसलिए इसे खूनी बवासीर कहते हैं।

बादी-बवासीर :-

* बाहर की बवासीर में दर्द तो होता है लेकिन उनसे खून नहीं निकलता है इसलिए इसे बादी-बवासीर कहते हैं।

बवासीर रोग होने के कारण :-

मलत्याग करते समय में अधिक जोर लगाकर मलत्याग करना और बार-बार जुलाव का सेवन करना...

बार-बार दस्त लाने वाली दवाईयों का सेवन करना..

उत्तेजक पदार्थों का अधिक सेवन करना..

अधिक मिर्च-मसालेदार भोजन का सेवन करना..

अधिक कब्ज की समस्या होना...

वंशानुगत रोग या यकृत रोग होना...

शारीरिक कार्य बिल्कुल न करना..

शराब का अधिक मात्रा में सेवन करना..

पेचिश रोग कई बार होना..

निम्नस्तरीय चिकनाई रहित खुराक लेना...

गर्भावस्था के समय में अधिक कष्ट होना तथा इस समय में कमर पर अधिक कपड़ें का दबाव रखना...

रात के समय में अधिक जागना...

मूत्र त्याग करने के लिए अधिक जोर लगना..

* मस्से के लिये कई घरेलू ईलाज हैं,लेकिन सबसे महत्वपूर्ण और आधार भूत बात यह है कि रोगी को २४ घंटे में ४ से ६ लिटर पानी पीने की आदत डालनी चाहिये। ज्यादा पानी पीने से शरीर से विजातीय पदार्थ बाहर निकलते रहेंगे और रोगी को कब्ज नहीं रहेगी जो इस रोग का मूल कारण है।

* हरी पत्तेदार सब्जियां,फ़ल और ज्यादा रेशे वाले पदार्थों का सेवन करना जरुरी है।

Pilonidal Cyst

Pilonidal Cyst

A pilonidal cyst, also referred as a pilonidal abscess, pilonidal sinus or sacrococcygeal fistula, is a cyst or abscess near or on the natal cleft of the buttocks that often contains hair and skin debris


Pilonidal cysts are quite painful, affect men more frequently than women, and typically occur between the ages of 15 and 24. Although usually found near the coccyx, the condition can also affect the navel, armpit or penis, though these locations are much more rare.

Some people with a pilonidal cyst will be asymptomatic.

Pilonidal Sinus:

A sinus tract, or small channel, may originate from the source of infection and open to the surface of the skin. Material from the cyst may drain through the pilonidal sinus. A pilonidal cyst is usually painful, but with draining, the patient might not feel pain.


One proposed cause of pilonidal cysts is ingrown hair. Excessive sitting is thought to predispose people to the condition because they increase pressure on the coccyx region. Trauma is not believed to cause a pilonidal cyst; however, such an event may result in inflammation of an existing cyst. However there are cases where this can occur months after a localized injury to the area. Some researchers have proposed that pilonidal cysts may be the result of a congenital pilonidal dimple. Excessive sweating can also contribute to the cause of a pilonidal cyst.

The condition was widespread in the United States Army during World War II. More than eighty thousand soldiers having the condition required hospitalization. It was termed "Jeep riders' disease," because a large portion of people who were being hospitalized for it rode in jeeps, and prolonged rides in the bumpy vehicles were believed to have caused the condition due to irritation and pressure on the coccyx

Fustula in Ano (Bhagandar)

Fustula in Ano (Bhagandar)

An anal fistula, or fistula-in-ano, is an abnormal connection between the epithelialised surface of the anal canal and (usually) the perianal skin.

Anal fistulae originate from the anal glands, which are located between the two layers of the anal sphincters and which drain into the anal canal. If the outlet of these glands becomes blocked, an abscess can form which can eventually point to the skin surface. The tract formed by this process is the fistula.


Diagnosis is by examination, either in an outpatient setting or under anesthesia (referred to as EUA - Examination Under Anaesthesia). The examination can be an anoscopy.


There are several stages to treating an anal fistula:

Kshar-sutra Treatment:

This method is most effective non surgical method. This treatment can be done by an Ayurvedic physician. In this method medicated Kshar-sutra is applied through the fistula tract with the help of special probe and it is changed weekly. Within few weeks the fistula tract is cured. Successful rate in this treatment are tremendous. Few surgeons who are aware of this treatment are also suggesting this treatment to the patients.

Treating active infection:

Some patients will have active infection when they present with a fistula, and this requires clearing up before definitive treatment can be decided.

Fissure in Ano (ANAL Fissure)

Fissure in Ano (ANAL Fissure)

Anal fissures are a natural crack or tear in the skin of the anal canal. Anal fissures may be noticed by bright red anal bleeding on the toilet paper, sometimes in the toilet. If acute they may cause severe periodic pain after defecation but with chronic fissures pain intensity is often less. Anal fissures usually extend from the anal opening and are usually located posteriorly in the midline, probably because of the relatively unsupported nature of the anal wall in that location. Fissure depth may be superficial or sometimes down to the underlying sphincter muscle.


Most anal fissures are caused by stretching of the anal mucosa beyond its capability. For example, anal fissures are common in women after childbirth, after difficult bowel movements, and in infants following constipation.

Superficial or shallow anal fissures look much like a paper cut, and may be hard to detect upon visual inspection, they will generally self-heal within a couple of weeks. However, some anal fissures become chronic and deep and will not heal. The most common cause of non-healing is spasming of the internal anal sphincter muscle which results in impaired blood supply to the anal mucosa. The result is a non-healing ulcer, which may become infected by fecal bacteria.

Be advised that anal fissures can be confused with a rare cancer such as anal cancer. It is wise to visit your family doctor or a general surgeon if you experience rectal bleeding.


For adults, the following may help prevent anal fissure:
  • Avoiding straining when defecating. This includes treating and preventing constipation by eating food rich in dietary fiber, drinking enough water, occasional use of a stool softener, and avoiding constipating agents such as caffeine. Similarly, prompt treatment of diarrhea may reduce anal strain.
  • Careful anal hygiene after defecation, including using soft toilet paper and/or cleaning with water.
  • In cases of pre-existing or suspected fissure, use of a lubricating ointment (e.g. hemorrhoid ointments) can be helpful.
  • In infants, frequent nappy/diaper change can prevent anal fissure. As constipation can be a cause, making sure the infant is drinking enough fluids (i.e. breast milk, proper ratios when mixing formulas. NOTE: See physician before giving infants any fluids outside breast milk and/or formula) may thus help avoid fissures. In infants, once an anal fissure has occurred, addressing underlying causes is usually enough to ensure healing occurs.


Kshar-sutra application at fissure region along with sentinel pile shows dramatic results. Sentinel pile sheds off like pile mass and the wound heals within a week.

Non-surgical treatment is recommended as first-line treatment of acute and chronic anal fissures. Customary treatments include warm sitz baths, topical anesthetics, high-fiber diet and stool softeners.

Haemorrhoids (Piles)

Haemorrhoids (Piles)

Hemorrhoids, emerods, or piles are swelling and inflammation of veins in the rectum and anus. The anatomical term "hemorrhoids" technically refers to "'Cushions of tissue filled with blood vessels at the junction of the rectum and the anus." However, the term is popularly used to refer to varicosities of the hemorrhoid tissue. Perianal hematoma are sometimes misdiagnosed and mislabeled as hemorrhoids, when in fact they have different causes and treatments.
  • External hemorrhoids are those that occur outside the anal verge (the distal end of the anal canal). Specifically they are varicosities of the veins draining the territory of the inferior rectal arteries, which are branches of the pudendal artery. They are sometimes painful, and can be accompanied by swelling and irritation. Itching, although often thought to be a symptom of external hemorrhoids, is more commonly due to skin irritation.
    • External hemorrhoids are prone to thrombosis: if the vein ruptures and/or a blood clot develops, the hemorrhoid becomes a thrombosed hemorrhoid.
  • Internal hemorrhoids are those that occur inside the rectum. Specifically they are varicosities of veins draining the territory of branches of the superior rectal arteries. As this area lacks pain receptors, internal hemorrhoids are usually not painful and most people are not aware that they have them. Internal hemorrhoids, however, may bleed when irritated, usually due to constipation.
  • Untreated internal hemorrhoids can lead to two severe forms of hemorrhoids: prolapsed and strangulated hemorrhoids:
    • Prolapsed hemorrhoids are internal hemorrhoids that are so distended that they are pushed outside the anus.
    • If the anal sphincter muscle goes into spasm and traps a prolapsed hemorrhoid outside the anal opening, the supply of blood is cut off, and the hemorrhoid becomes a strangulated hemorrhoid.

Classification by degree of prolapse:

The most common grading system was developed by Banov:
Grading of Internal Hemorrhoids
  • Grade I: The hemorrhoids do not prolapse.
  • Grade II: The hemorrhoids prolapse upon defecation but spontaneously reduce.
  • Grade III: The hemorrhoids prolapse upon defecation, but must be manually reduced.
  • Grade IV: The hemorrhoids are prolapsed and cannot be manually reduced.


Many anorectal problems, including fissures, fistulae, abscesses, anal melanoma or irritation and itching, also called pruritus ani, have similar symptoms and are incorrectly referred to as hemorrhoids.

Hemorrhoids are usually not dangerous or life threatening. In most cases, hemorrhoidal symptoms will go away within a few days.

Although many people have hemorrhoids, and hemorrhoidal radiation, not all experience symptoms. The most common symptom of internal hemorrhoidal radiation is bright red blood covering the feces (hematochezia), on toilet paper, and/or in the toilet bowl. However, an internal hemorrhoid may protrude through the anus outside the body, becoming irritated and painful. This is known as a protruding hemorrhoid.

Symptoms of external hemorrhoids may include painful swelling or a hard lump around the anus that results when a blood clot forms. This condition is known as a thrombosed external hemorrhoid.

In addition, excessive straining, rubbing, or cleaning around the anus may cause irritation with bleeding and/or itching, which may produce a vicious circle of symptoms. Draining anal mucus, produced by the dentate line may also cause itching.


Sitting for long periods of time can start the hemorrhoidic process.

Increased straining during bowel movements caused by constipation or diarrhea may lead to hemorrhoids. It is thus a common condition due to constipation caused by water retention in women experiencing premenstrual syndrome or menstruation.

Hypertension, particularly portal hypertension, can also cause hemorrhoids because of the connections between the portal vein and the vena cava which occur in the rectal wall - known as portocaval anastomoses.

Obesity can be a factor by increasing rectal vein pressure. Poor muscle tone or poor posture can result in too much pressure on the rectal veins.

Pregnancy may lead to hypertension and increase strain during bowel movements, so hemorrhoids are often associated with pregnancy.

Insufficient liquid can cause a hard stool, or even chronic constipation, which can lead to hemorrhoidal radiation. An excess of lactic acid in the stool, a product of excessive consumption of dairy products, such as yogurt, can cause radiation; reducing such consumption can bring relief. Vitamin E deficiency is also a common cause. Eating spicy food does not cause hemorrhoids, though spicy foods may aggravate the condition.


Prevention of hemorrhoids includes drinking more fluids, eating more dietary fiber (such as fruits, vegetables and cereals high in fiber), exercising, practicing better posture, and reducing bowel movement strain and time. Wearing tight clothing and underwear may also contribute to irritation and poor muscle tone in the region and promote hemorrhoid development.

Women who notice they have painful stools around the time of menstruation would be well-advised to begin taking extra dietary fiber and fluids a couple days prior to that time.

Fluids emitted by the intestinal tract may contain irritants that may increase the fissures associated with hemorrhoids. Washing the anus with cool water and soap may reduce the swelling and increase blood supply for quicker healing and may remove irritating fluid.

Many people do not get a sufficient supply of dietary fiber (20 to 25 grams daily), and small changes in a person's daily diet can help tremendously in both prevention and treatment of hemorrhoids.


Endoscopic image of internal hemorrhoids seen on retro flexion of the flexible sigmoidoscope at the ano-rectal junction

After visual examination of the anus and surrounding area for external or prolapsed hemorrhoids, a doctor may conduct a digital examination. In addition to probing for hemorrhoidal bulges, a doctor may also look for indications of rectal tumor or polyp, enlarged prostate and abscesses.

Visual confirmation of hemorrhoids can be done by doing an anoscopy, using a medical device called an anoscope. This device is basically a hollow tube with a light attached at one end that allows the doctor to see the internal hemorrhoids, as well as polyps in the rectum.

If warranted, more detailed examinations, such as sigmoidoscopy and colonoscopy can be performed. In sigmoidoscopy, the last 60 cm of the colon and rectum are examined whereas in colonoscopy the entire large bowel (colon) is examined.


Treatments for hemorrhoids vary in their cost, risk, and effectiveness. Different cultures and individuals approach treatment differently. Some of the treatments used are listed here in increasing order of intrusiveness and cost.

Home treatments:

For many people, hemorrhoids are mild and temporary conditions that heal spontaneously or by the same measures recommended for prevention.

Temporary relief from symptoms can be provided by:
  • Hydrotherapy with a bathtub, bidet, or extend-able shower head. Especially in the case of external hemorrhoids with a visible lump of small size, the condition can be improved with warm bath causing the vessels around the rectal region to be relaxed.
  • Cold compress.
  • Topical analgesic (pain reliever), such as xylocaine or pramocaine.
  • Systemic (pill-form) analgesic (pain reliever).
  • Topical corticosteroid such as hydrocortisone. (May weaken the skin and may contribute to further flare-ups).
  • Topical vasoconstrictor such as phenylephrine.
  • Topical moisturizer.
Topical medicines may be delivered as an ointment or suppository. Some hemorrhoid-specific medications contain a mixture of multiple ingredients, such as Preparation H, Proctosedyl, and Faktu.

Ayurvedic Kshar-sutra application:

These days Ayurvedic Kshar-sutra treatment is in trends. This is the method of treatment of hemorrhoids which is described in ancient Ayurvedic grantha. It is showing high successful rate and negligible reoccurrence. This is non surgical treatment and can be done by experienced physician. In this treatment Kshar-sutra is applied in the hemorrhoids under local anesthesia/general anesthesia and the pile mass sheds off within seven to ten days with stool. Indian Council of Medical Research (ICMR) has tried this technique in Hospitals in Metro Cities for ten years and then declared this technique the most successful procedure for treatment of hemorrhoids. In fistula in ano Kshar-sutra is showing tremendous results. Most surgeons are also treating fistula in ano with Kshar-sutra because surgery can cause incontinence and some chances of reoccurrence are always there after surgery.

Surgical and Non-medicinal Treatments:
  • Rubber band ligation, sometimes called Baron ligation. Elastic bands are applied onto an internal hemorrhoid to cut off its blood supply. Within several days, the withered hemorrhoid is sloughed off during normal bowel movement.
  • Hemorrhoidolysis, desiccation of the hemorrhoid by electrical current.
  • Sclerotherapy, sclerosant or another hardening agent is injected into hemorrhoids. This causes the vein walls to collapse and the hemorrhoids to shrivel up.
  • Cryosurgery, a frozen tip of a cryoprobe is used to destroy hemorrhoidal tissues. Rarely used anymore because of side effects.
  • Hemorrhoidectomy, a surgical excision of the hemorrhoid. Has possible correlation with incontinence issues later in life; in addition, many patients complain that pain during recovery is severe. For this reason it is often now recommended only for severe (grade IV) hemorrhoids.
  • Doppler guided hemorrhoidal artery ligation, which cuts the artery that delivers blood to the hemorrhoid. It is the best treatment for bleeding piles, as the bleeding stops immediately.
Natural Treatments:
  • Eating fiber-rich diets, including water, helps create a softer stool that is easier to pass, to lessen the irritation of existing hemorrhoids.
  • Using the squatting position for bowel movements.
  • Dietary supplements can help treat and prevent many complications of hemorrhoids.

Diseases with Similar Symptoms:

Symptoms associated with rectal cancer, anal fissure, anal abscess, anal fistula, perianal hematoma, and other diseases may be similar to those produced by hemorrhoids and may be reduced by the topical analgesic methods described above. For this reason, it is a good idea to consult with a physician when these symptoms are encountered, particularly for the first time, and periodically should the problem continue. Colonoscopy is recommended as a general diagnostic for those over age 50 (40 with family history of bowel cancers.