सोमवार, 16 मई 2016

चंदन

चंदन की पैदावार तमिलनाडु, मालाबार और कर्नाटक में अधिक होती है। इसका पेड़ सदाबहार और 9 से 12 मीटर तक ऊंचा होता है। बाहर से इसकी छाल का रंग मटमैला और काला और अन्दर से लालिमायुक्त लंबे चीरेदार होता है। इसके तने के बाहरी भाग में कोई गंध नहीं होती है जबकि अन्दर का भाग सुगन्धित और तेल युक्त होता है। चंदन के पत्ते अण्डाकार तथा 3 से 6 सेमी तक लम्बे होते हैं। इसके फूल गुच्छों में छोटे-छोटे पीलापन लिए हुए, बैंगनी रंग के तथा गंधहीन होते हैं। चंदन के फल छोटे-गोल, मांसल और पकने पर बैंगनी रंग के तथा बिना किसी गंध के होते हैं। आमतौर पर चंदन में फूल और फल की बहार जून से सितम्बर और नवम्बर से फरवरी तक आती है। चंदन के पेड़ की आयु लगभग 50 वर्ष होती है। चंदन 5-6 प्रकार का होता है जिसमें सफेद लाल, पीत (पीला), कुचंदन (पतंगों) के रंगों के आधार पर जाने जाते हैं। उत्तम चंदन स्वाद में कटु घिसने पर पीला ऊपर से सफेद काटने में लाल, कोटरयुक्त और गांठदार होता है।

विभिन्न रोगों में उपयोग :

1. शरीर की जलन :
चंदन और कपूर को घिसकर शरीर पर लेप करने से शरीर की जलन दूर हो जाती है।
हाथ-पैरों की जलन को दूर करने के लिए सरसों का तेल या चंदन के तेल की मालिश करें।

2. खुजली :
चंदन के तेल को नींबू के रस में मिलाकर लेप करने से खुजली समाप्त हो जाती है।
दूध के अन्दर चंदन या नारियल का तेल और कपूर मिलाकर लगाने से खुजली दूर हो जाती है।

3. मूत्रकृच्छ और रक्तातिसार: चंदन को चावल के पानी में घिसकर शहद और शक्कर के साथ पीने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) और रक्तातिसार (खूनी दस्त) मिट जाता है।
4. मूत्र रोग: लगभग 8 से 10 बूंद चंदन का तेल बताशे में डालकर एक कप दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पेशाब की जलन, पेशाब में पीप आना बंद हो जाती है।
5. शरीर पर गर्मी से उत्पन्न फुंसियां: शरीर पर गर्मी से पैदा हुई फुंसियों पर चंदन और गुलाबजल में पिसे हुए धनिये और खस का लेप करना चाहिए। केवल चंदन भी लाभ करता है।

6. गर्मी :
चावल के पानी में सफेद चंदन घिसकर चीनी के साथ देने से गर्मी में राहत मिलती है।
गर्मी के दिनों में शरीर की गर्मी दूर करने के लिए 20 ग्राम चंदन को घिसकर मिश्री मिलाकर शर्बत बनाकर पीने से मानसिक शान्ति मिलती है और शरीर को भी शांति मिलती है।

7. हिचकी :
स्त्री के दूध में चंदन को घिसकर नाक में डालने से हिचकी आना बंद हो जाती है।
चंदन और नीमगिलोय का चूर्ण सूंघने से हिचकी में लाभ होता है।
स्त्री के दूध में लाल चंदन को घिसकर सूंघने से हिचकी नहीं आती है।

8. प्रमेह और प्रदर: लगभग 10 ग्राम वंशलोचन और 10 ग्राम इलायची के दानों को बारीक पीसकर कपडे़ से छान लेते हैं। इसके बाद उसे चंदन के तेल में मिलाकर सुपारी के बराबर गोलियां बनाएं। सुबह-शाम 5 ग्राम चीनी को 40 मिलीलीटर ठण्डे पानी में मिलाकर एक-एक गोली के साथ सेवन करना चाहिए। इसका पथ्य गेहूं की रोटी, अरहर की दाल, घी और चीनी है।
9. तेज बुखार में नींद न आने और सिर दर्द करने पर: कपूर, केसर और चंदन को घिसकर सिर पर लगाने से तेज बुखार की वजह से नींद न आना और सिर में दर्द में लाभ मिलता है।
10. शरीर के किसी जगह पर सूजन होने से जलन: जलन के स्थान पर चंदन को घिसकर कुछ दिनों तक लेप करते रहने से जलन दूर होकर सूजन ठीक हो जाती है।
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